झुंझुनूं जिले के मंड्रेला कस्बे के वार्ड संख्या-16 स्थित सागरजी की ढाणी में मंगलवार अलसुबह हुई तेज बारिश के दौरान केटीए पावर प्लांट की चारदीवारी टूट गई। इससे प्लांट का गंदा पानी और कचरा आसपास के किसानों के खेतों में फैल गया। राधेश्याम सैनी सहित कई किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं और खेत तालाब बन गए। घटना के बाद किसानों ने प्लांट प्रबंधन और प्रशासन से उचित मुआवजा और स्थायी समाधान की मांग की है। किसानों के अनुसार, मूसलाधार बारिश के दौरान प्लांट परिसर की दीवार ढह गई, जिससे भारी मात्रा में गंदा पानी, कीचड़ और कचरा खेतों में पहुंच गया। पीड़ित किसान राधेश्याम सैनी ने बताया कि उनका खेत पूरी तरह पानी और कीचड़ से भर गया है और फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उनका कहना है कि खेती में पूरी जमापूंजी लगाने के बावजूद अब परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि पहले भी 3 सालों से बारिश के दौरान प्लांट का दूषित पानी उनके खेतों में पहुंच रहा है, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रबंधन ने केवल आश्वासन दिए और स्थायी समाधान नहीं किया। उनका कहना है कि खेतों में कई फीट तक गंदा पानी और कचरा जमा होने से न केवल इस बार की फसल बर्बाद हुई है, बल्कि कृषि भूमि की उर्वरता भी खराब हो रही है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट की ओर से उनके खेतों के ऊपर से हाई वोल्टेज विद्युत लाइनें निकाली गई थीं, जिनके बदले उचित मुआवजा देने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक भुगतान नहीं किया गया। पीड़ित किसान सत्यनारायण सैनी ने कहा कि केटीए पावर प्लांट की लापरवाही का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। हर साल फसलें खराब हो रही हैं, जबकि मुआवजे और स्थायी समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिलते हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और प्लांट प्रबंधन ने जल्द नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा नहीं दिया और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उधर, केटीए पावर प्लांट के डीजीएम मनोज कुमार ने घटना की जानकारी होने की पुष्टि करते हुए कहा कि समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, किसानों का कहना है कि हर साल ऐसे ही आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं होता।