केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) के विरोध में आज श्रमिक संगठनों और मेडिकल रिप्रजेंटेटिव्स (MR) ने एकजुट होकर 'राष्ट्रव्यापी काला दिवस' मनाया। झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली और विरोध प्रदर्शन किया। 'मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान' (मासा) के आह्वान पर क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा द्वारा झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया गया। हाथों में बैनर और माथे पर काली पट्टी बांधे मजदूरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार निजीकरण के जरिए आम जनता से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं छीन रही है। आंदोलनकारियों की 5 प्रमुख मांगें मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स ने दिखाई एकजुटता मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने काली पट्टी बांधकर और काले बैज लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया, जिसमें इन कानूनों पर पुनर्विचार की मांग की गई है। बोले- नए श्रम कोड मजदूर विरोधी हैं श्रमिक संगठनों का तर्क है कि ये नए श्रम कोड मजदूर विरोधी हैं और इन्हें केवल कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने इन कानूनों की तुलना ब्रिटिश औपनिवेशिक काल की। वक्ताओं ने कहा कि नए नियमों से मजदूर संगठनों का पंजीकरण और संचालन कठिन हो जाएगा। लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने और हड़ताल करने का अधिकार लगभग समाप्त किया जा रहा है। संगठनों ने कहा कि 1926 के ट्रेड यूनियन अधिनियम जैसे कानूनों ने जो अधिकार मजदूरों को दिए थे, उन्हें खत्म कर इतिहास को पीछे धकेला जा रहा है।