जोधपुर में फर्जी अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने वाली शातिर टटलूबाज गैंग का जीआरपी ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गैंग के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से ठगी का सोना बरामद कर लिया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुट गई है। जोधपुर में ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ज्यादा नकदी, जेवरात या कीमती सामान ले जाने पर पुलिस कार्रवाई का डर दिखाते थे और फिर "अमाउंट कार्ड" बनवाने के नाम पर उनसे रुपए ऐंठ लेते थे। गिरफ्तार आरोपियों में पुष्पेन्द्र बसंतवानी(58), निवासी आनंद पर्वत/शास्त्रीनगर, नई दिल्ली, मिठू सिंह(43) निवासी सिरियारी, जिला पाली (राज.),अपुजर आलम(23) निवासी टेढ़ागाछ, जिला किशनगंज बिहार शामिल है। मिठू सिंह के खिलाफ पहले से चोरी, लूट और मारपीट के मामले कई थानों में दर्ज है। ASI चरण सिंह ने बताया कि यह गैंग मुख्य रूप से दूसरे राज्यों से आकर मजदूरी या व्यापार करने वाले सीधे-साधे यात्रियों को अपना शिकार बनाती थी। बंगाल के कारीगर से ठग लिए थे 15 ग्राम सोना और मोबाइल दरअसल, मई 2026 में पश्चिम बंगाल निवासी भावेश धोलाई ने जोधपुर जीआरपी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। भावेश जोधपुर में रहकर ज्वेलरी पर कारीगरी का काम करता था। वह अपनी मजदूरी के रूप में मिला 15 ग्राम सोने का बिस्किट का टुकड़ा लेकर घर जाने के लिए जोधपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था। तभी बदमाशों ने उसे अपनी बातों के जाल में फंसा लिया और कहा कि इतना सोना बिना लाइसेंस ले जाने पर पुलिस पकड़ लेगी, इसके लिए अमाउंट कार्ड बनवाना पड़ेगा। इसके बाद आरोपी झांसा देकर उसका 15 ग्राम सोना, 3000 कैश, मोबाइल और डॉक्यूमेंट लेकर फरार हो गए। इस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। स्टेशन या बस स्टैंड पर अकेले बैठे यात्रियों के पास जाते थे आरोपी ASI चरण सिंह ने बताया कि मामला दर्ज होने के बाद जीआरपी थानाधिकारी मुक्ता पारीक के नेतृत्व में गठित स्पेशल टीम ने गैंग के बारे में जानकारी जुटाई। गैंग के सदस्य स्टेशन या बस स्टैंड पर अकेले बैठे यात्रियों के पास जाते थे। आरोपी बंगाली, बिहारी और राजस्थानी भाषा के जानकार है, इसलिए वे यात्री की भाषा में बात कर पहले भरोसा जीतते थे और बातों-बातों में पता लगा लेते थे कि यात्री के पास कितना कैश या जेवर है। फर्जी अफसर की एंट्री जैसे ही माल का पता चलता, गैंग का मुख्य सरगना जो दूर बैठा रहता था, वहां आता था। गैंग के बाकी सदस्य जो यात्री के पास अनजान बनकर बैठे होते थे, वे खड़े होकर नाटक करते थे कि अरे साहब आ गए, इन्होंने पिछली बार भी हमारा अमाउंट कार्ड बनाया था, जिससे रास्ते में कोई परेशानी नहीं हुई। विश्वास में लेकर आरोपी हो जाते थे फरार इसके बाद साथ में चलने वाले-यात्रियों को फर्जी अफसर से कार्ड बनवाते देख पीड़ित को भी भरोसा हो जाता था। फिर कथित फर्जी पुलिस या जीएसटी अधिकारी यात्री का पूरा कीमती सामान और कैश लेकर अमाउंट कार्ड जो रेलवे के एमएसटी कार्ड जैसा दिखता था, बनाने का नाटक करता था और सामान समेटकर वहां से रफूचक्कर हो जाता था। थोड़ी देर बाद गैंग के बाकी साथी भी वहां से खिसक जाते थे। लॉन्ग रूट के यात्रियों को भी बनाते थे निशाना पुलिस के अनुसार, यह गैंग केवल अमाउंट कार्ड ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी की ट्रेनों में जाने वाले यात्रियों को कन्फर्म रिजर्वेशन दिलाने का झांसा देकर भी मोटी ठगी की वारदातों को अंजाम देती थी। वारदात के बाद आरोपी अलग-अलग रास्तों से दिल्ली भाग जाते थे। जीआरपी जोधपुर और साइबर सेल की टीम ने बारीकी से डेटा खंगालकर और तकनीकी विश्लेषण के जरिए इन तीनों को बदमाशों को दबोचा, जिन्हें कोर्ट ने जेल भेज दिया है।