केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) आयुक्तालय, जोधपुर की एंटी इवेजन शाखा ने 24 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की चोरी पकड़ी है। टीम ने इसका खुलासा करते हुए सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगाने वाले मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया। सीजीएसटी की एंटी इवेजन शाखा की टीम ने जोधपुर के लालसागर स्थित दिलीप नगर निवासी ललित चांडक पुत्र ताराचंद को बुधवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे 28 जुलाई तक जेल भेज दिया है। कागजों पर बनीं कंपनियां, बिना माल बेचे काटे बिल सीजीएसटी टीम की जांच में सामने आया है कि आरोपी ललित चांडक ने सुनियोजित तरीके से तीन फर्जी फर्में बनाईं। इन फर्मों के जरिए बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की सप्लाई किए ही करोड़ों रुपए के फर्जी टैक्स इनवॉइस (बिल) जारी किए जा रहे थे। इन फर्जी बिलों के आधार पर आरोपी ने न केवल खुद अवैध रूप से आईटीसी का लाभ उठाया, बल्कि धोखाधड़ी से अन्य लोगों को भी यह क्रेडिट पास कर दिया। इस तरीके से तकरीबन 24 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी करना सामने आया है। जोधपुर सीजीएसटी कमिश्नर एचएन मीणा ने बताया कि बोगस फर्मों के जरिए आईटीसी अवेल करने वाले नेटवर्क से जुड़ी अन्य फर्मों का भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके। एक फर्म का मालिक, अन्य का प्रतिनिधि या मैनेजर आरोपी ललित चांडक मुख्य रूप से जोधपुर के मंडोर रीको इंडस्ट्रियल एरिया एफ-30 स्थित 'मैसर्स पीके इंडस्ट्रीज' का मालिक है। इसके अलावा वह कागजों पर चल रही दो अन्य फर्जी फर्मों का भी अधिकृत प्रतिनिधि, मैनेजर और ऑपरेटर है। इनमें 'मैसर्स दिव्या मगज इंडस्ट्रीज' और 'मैसर्स कियारा इम्पेक्स' नामक फर्म शामिल हैं। बोगस बिलिंग नेटवर्क, फिर भी नहीं बच पाया सीजीएसटी सूत्रों के अनुसार आरोपी ललित चांडक ने बेहद शातिराना तरीके से बोगस बिलिंग का नेटवर्क खड़ा कर रखा था, लेकिन उसकी कारस्तानी विभाग की नजरों से बच नहीं पाई। सीजीएसटी टीम को जांच के दौरान मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सीजीएसटी एक्ट, 2017 के कड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।