राजस्थान पहली बार इंटरनेशनल टाइप-1 डायबिटीज समिट की मेजबानी करेगा। 30 जुलाई से 1 अगस्त तक जोधपुर में होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, रिसर्चर, हेल्थ एक्सपर्ट, नीति निर्माता और पेशेंट एडवोकेट शामिल होंगे। सम्मेलन में टाइप-1 डायबिटीज के बेहतर इलाज, समय पर पहचान और मरीजों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाने के उपायों पर चर्चा होगी। इस साल बच्चों में होने वाली टाइप-1 डायबिटीज को भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में शामिल किया गया है। शुरुआती पहचान से लेकर नई तकनीकों तक होगी चर्चा तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में टाइप-1 डायबिटीज की शुरुआती पहचान, सभी मरीजों तक इंसुलिन की समान पहुंच, कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM), नई डायबिटीज तकनीक, डिजिटल हेल्थ, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, मरीजों की देखभाल की व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति जैसे विषयों पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे। भारत के लिए तैयार होंगे सुझाव इस सम्मेलन का लक्ष्य भारत में टाइप-1 डायबिटीज से जुड़े हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव तैयार करना है। साथ ही सरकार, अस्पतालों, मेडिकल संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मरीजों के समूहों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा, ताकि लंबे समय तक बेहतर उपचार और देखभाल सुनिश्चित की जा सके। पद्मजा कुमारी परमार कर रही हैं आयोजन इसकी मेजबानी 'द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़' की संस्थापक और 'ब्रेकथ्रू टी1डी' की ग्लोबल एंबेसडर पद्मजा कुमारी परमार कर रही हैं। वह 5 साल की उम्र से ही टाइप-1 डायबिटीज के साथ जीवन जी रही हैं और पिछले चार दशकों से इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ मरीजों के अधिकारों के लिए काम कर रही हैं। उनकी संस्था स्वास्थ्य जागरूकता, डायबिटीज, महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़े कई कार्यक्रम संचालित कर रही है।