जोधपुर नगर निगम को 25 सितंबर को मेयर और 26 सितंबर को डिप्टी मेयर मिल जाएगा। अब सवाल ये है कि आखिर बोर्ड किसका बनेगा। भाजपा-कांग्रेस में मेयर की कुर्सी के लिए जोड़-तोड़ और दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। 51 पार्षदों के समर्थन को ध्यान में रखते हुए भाजपा और कांग्रेस में संभावित चेहरों को लेकर मंथन शुरू हो गया है। दोनों दलों की ओर से 6-6 प्रत्याशियों के दावे सामने आए हैं, जबकि कुल 11 नामों को लेकर चर्चा है। कांग्रेस संभावित दावेदारों से वन-टू-वन बातचीत करेगी, वहीं भाजपा में ऑब्जर्वर पार्षदों से राय लेकर नाम पर फीडबैक जुटाएंगे। बताया जा रहा है कि दोनों दलों में मेयर पद के 3-3 दावेदार प्रमुख है, इनमें से 1-1 नामों की घोषणा जल्द होगी। दरअसल, EVM में खराबी के कारण 50 नंबर वार्ड का रिजल्ट होल्ड किया गया था। बुधवार को यहां दोबारा वोटिंग हुई और गुरुवार को रिजल्ट आए। इन रिजल्ट में ये सीट भाजपा के खाते में गई है। ऐसे में अब भाजपा के पास 45 और कांग्रेस के पास 44 पार्षद है। बाकी 10 निर्दलीय और 1 आरएलपी पार्टी से जुड़ा पार्षद है। अब दोनों पार्टियां अपना-अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रही है। भाजपा की ओर से दावा किया जा रहा है कि उनके पास 6 निर्दलीय पार्षद है, इनमें से 3 से 4 भाजपा समर्थित है। यानी तस्वीर साफ है कि 11 निर्दलीय समेत अन्य दल के प्रत्याशी ही बोर्ड के किंगमेकर होंगे। वहीं कांग्रेस के पास पांच निर्दलीय पार्षदों का दावा कर रही है। एक-दो प्रत्याशी उनके कॉन्टैक्ट में है। ऐसे में दावा किया जा रहा है मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग की भी पूरी संभावना है। कांग्रेस: मेयर के लिए पार्षदों की सहमति और वन टू वन कांग्रेस ने अपना बोर्ड बनाने को लेकर कवायद शुरू कर दी है। दावा है कि 5 पार्षद उनके खेमे में है। ये वे पार्षद हैं, जो कांग्रेस के परंपरागत वार्ड है। दो दिन पहले ही इन सभी को एक कार में बैठाकर ले जाया जा चुका था। दावा ये भी है कि इनके अलावा दो से तीन और प्रत्याशियों से कॉन्टैक्ट कर रहे हैं। वहीं मेयर पद के उम्मीदवारों के लिए पार्षदों से पहले ही चर्चा हो चुकी है। यानी साफ मैसेज दे दिया है कि संगठन की ओर से जो नाम फाइनल होगा, उस पर सभी की सहमति होगी। लेकिन, मेयर पद के नाम को लेकर कोई नाराजगी नहीं रहे, इसके लिए पार्षदों से दोबारा सहमति चर्चा की जा रही है। कांग्रेस के पास भी तीन से चार प्रमुख मेयर के दावेदार है। जो दावेदार है उनसे संगठन के स्तर पर वन टू वन यानी सीधी बातचीत भी की जा रही है। कांग्रेस की ओर से शनिवार को मेयर पद के प्रत्याशी के लिए नामांकन किया जाएगा। कांग्रेस के ये तीन प्रमुख दावेदार नरेश जोशी क्यों: जोधपुर में ब्राह्मण समाज के प्रमुख चेहरे और पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष रह चुके जोशी ने वार्ड 40 से भाजपा के पूर्व उप-महापौर देवेंद्र सालेचा को 299 वोटों से शिकस्त दी है। अशोक गहलोत के शासनकाल में संगठन चलाने का उनका अनुभव काफी काम आ सकता है। गणपत सिंह चौहान क्यों: पूर्व में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके गणपत सिंह के पास निगम की अंदरूनी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक कामकाज का लंबा अनुभव है, जो उनका सबसे बड़ा मजबूत पक्ष है। प्रदीप गांग क्यों: प्रदीप गांग ओसवाल जैन समाज से ताल्लुक रखते हैं, जिसका जोधपुर की शहरी राजनीति और व्यापारिक तबके पर गहरा प्रभाव है। बीजेपी: मेयर के लिए संगठन की हरी झंडी का इंतजार इन चुनावों में बीजेपी ने बाड़ेबंदी कर दो रणनीति रखी- पहली वोटिंग और दूसरी काउंटिंग। वोटिंग होने के तुरंत बाद से ही अपनी पार्टी के प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर उन्हें बालोतरा के पास एक रिसॉर्ट में भेज दिया गया था। इसके बाद काउंटिंग के दौरान भाजपा समर्थित प्रत्याशी, जिन्होंने जीत हासिल की है। उन्हें भी उसी दिन बाड़ेबंदी में लेने का दावा किया गया था। मेयर पद को लेकर पार्टी पदाधिकारियों, पर्यवेक्षक और संगठन के बीच चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि ऑब्जर्वर सभी पार्षदों से मेयर पद के दावेदारों को लेकर चर्चा करेंगे। इसके बाद एक नाम फाइनल किया जाएगा। एनवक्त पर बीजेपी इन नामों का खुलासा करेगी। बताया जा रहा है कि यहां भी तीन नामों का पैनल तैयार किया गया है। 6 निर्दलीय प्रत्याशियों का दावा, इनमें तीन भाजपा समर्थित, एक कांग्रेस की बागी भाजपा की ओर से दावा किया जा रहा है कि 6 निर्दलीय प्रत्याशी उनके पास है। इनमें से तीन भाजपा समर्थित है, जो निर्दलीय चुनाव लड़े थे। इनमें मोहन चौधरी, स्वरूप सिंह और दुर्गा मेवाड़ा है। दो अन्य निर्दलीय प्रत्याशी है। इसके अलावा कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ी निर्मला नायक भी भाजपा की बाड़ेबंदी है। निर्मला नायक को लेकर बुधवार को उनके ससुर और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि भाजपा की ओर से जबरदस्ती परिवार को बंदी बनाया गया है। इसके बाद गुरुवार को निर्मला नायक और उनके पति का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें दावा किया कि दोनों अपनी मर्जी से घूमने गए है और दोनों पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं था। बीजेपी में मेयर पद के ये प्रमुख दावेदार… मेघराज लोहिया क्यों: वरिष्ठ भाजपा नेता मेघराज लोहिया ने वार्ड संख्या 42 से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ओंकार वर्मा को 279 वोटों से हराकर अपनी ताकत का अहसास कराया है। पूर्व में राजसिको के चेयरमैन रह चुके लोहिया का दावा भाजपा का बोर्ड बनने की स्थिति में सबसे मजबूत माना जा रहा है। वे पार्टी के बेहद वरिष्ठ कार्यकर्ता होने के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेहद करीबी माने जाते हैं। प्रसन्नचंद मेहता क्यों: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रसन्नचंद मेहता संगठन के पुराने सिपाही हैं और भाजपा में जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के भी नजदीकी है। कमलेश पुरोहित क्यों: महापौर की रेस में तीसरा बड़ा नाम कमलेश पुरोहित का है। कमलेश नगर सुधार न्यास में न्यासी के रूप में पहले काम कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा होने के कारण भी पार्टी आलाकमान उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर सकता है।