राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने एक पुलिस सब इंस्पेक्टर के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट की तामील नहीं होने पर पुलिस की कार्य शैली पर नाराजगी जताते हुए कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने स्थिति को "अत्यंत खेदजनक" करार देते हुए कहा कि ‘इससे बदतर स्थिति कोई और नहीं हो सकती।’ कोर्ट ने जोधपुर रेंज आईजी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि जब खुद पुलिस अधिकारी ही कोर्ट के वारंट की अनदेखी करें, तो ये न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है। जबकि वह स्वयं किसी स्थान पर ड्यूटी पर तैनात हो सकता है। एक साल से गवाही देने नहीं आए I/O, पुलिस नहीं कर पाया वारंट तामील यह पूरा मामला गुणवंतलाल नागदा बनाम राजस्थान सरकार केस के आपराधिक जमानत प्रकरण की सुनवाई से जुड़ा है। सिरोही के स्वरूपगंज थाने में 2023 में दर्ज मामला, जिसमें सब इंस्पेक्टर कमल सिंह जांच अधिकारी (I/O) हैं। ट्रायल कोर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कमल सिंह को 27 मई 2025 को गवाह के रूप में पेश किया गया था। उस दिन उनकी गवाही शुरू हुई, लेकिन समय की कमी के कारण वह अधूरी रह गई। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 10 जून 2025 को फिर से उपस्थित होने के लिए पाबंद किया था। हैरानी की बात यह है कि जून 2025 के बाद से यह अधिकारी एक बार भी कोर्ट में नहीं आए। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बुलाने के लिए कई बार गिरफ्तारी वारंट जारी किए, लेकिन पुलिस ने अपने ही विभाग के इस अधिकारी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश नहीं किया। परिणामस्वरूप, पिछले एक साल से मामले की सुनवाई केवल इसलिए रुकी हुई है, क्योंकि मुख्य गवाह (जांच अधिकारी) उपलब्ध नहीं है। हाईकोर्ट ने इसी विफलता पर संज्ञान लिया है कि जो पुलिस अधिकारी संभवतः कहीं न कहीं ड्यूटी पर तैनात होगा, उसका ही वारंट पुलिस तामील नहीं करवा पा रही है। तल्ख टिप्पणी: "पुलिस महकमे के भीतर ही वारंट की गंभीरता नहीं" जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि यह स्थिति बहुत दुखद है कि एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट का निष्पादन नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने माना कि यह न केवल न्यायिक प्रक्रिया में बाधा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पुलिस महकमे के भीतर वारंट की गंभीरता को महत्व नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कई अन्य मामलों में भी ऐसा ही पैटर्न देखा गया है, जहां पुलिस कर्मियों के वारंट तामील नहीं होते। यह 'गणेश राम बनाम राजस्थान राज्य' मामले में हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। अदालत ने पुलिस की जवाबदेही तय करने के लिए दिए आदेश आईजी की व्यक्तिगत पेशी: आईजी, जोधपुर रेंज को 28 मई को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। उन्हें कोर्ट को संतुष्ट करना होगा कि उनके अधीनस्थ अधिकारी अपनी ड्यूटी निभाने में विफल क्यों हो रहे हैं। एडिशनल एसपी करेंगे गिरफ्तारी: कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को नया गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्देश दिया है। आईजी जोधपुर रेंज को आदेश दिया गया है कि वे इस वारंट की तामील के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से कम रैंक के अधिकारी को नियुक्त नहीं करेंगे। सब-इंस्पेक्टर को पेश करने का जिम्मा: नियुक्त एडिशनल एसपी की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि वह संबंधित सब-इंस्पेक्टर कमल सिंह को गिरफ्तार करे और अगली सुनवाई से पहले ट्रायल कोर्ट में पेश करे। दोषियों की सूची: आईजी को उन सभी कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची पेश करनी होगी, जो वारंट जारी होने के बाद से अब तक इसे तामील कराने में विफल रहे। साथ ही, उनकी लापरवाही के लिए उनके खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है, इसकी जानकारी भी देनी होगी।