जोधपुर में चिन्मय मिशन की ओर से भगवद गीता के अध्याय 12 पर आधारित कार्यक्रम ‘भगवान के प्रिय कौन हैं’ का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन स्वामी अभेदानंद महाराज के सानिध्य में 2 मई से 7 मई तक स्टील भवन शास्त्री नगर में आयोजित होगा। कार्यक्रम का आयोजन शाम 6.30 से 8 बजे तक किया जाएगा जबकि 8 मई को 110वीं चिन्मय जयंती मनाई जाएगी। इस अवसर पर स्वामी अभेदानंद ने कहा कि जिन लोगों ने गीता का सहारा लिया है उनके जीवन में कभी अशांति नहीं आई। उन्होंने कहा- भगवान ने हमें इतना सुंदर जीवन दिया है। जिसका उद्देश्य सिर्फ पैसे कमाना नहीं बल्कि रोते हुए के आंसू पोछना और लोगों की मदद करना होना चाहिए। स्वामी अभेदानंद ने कहा पहले बच्चे माता पिता से डरते थे, लेकिन अब समय बदल गया है और माता पिता बच्चों से डरने लग गए हैं। क्योंकि आजकल के युवाओं में अहंकार ज्यादा बढ़ने लगा है। युवाओं को इससे बचने के लिए गीता का सहारा लेना चाहिए। ईश्वर क्या है, देश, समाज के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है इस पर भी हमारा फोकस होना चाहिए। उन्होंने कहा आज के समय की जरूरत को देखते हुए स्कूलों में गीता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। जिससे बच्चों के स्वभाव में निश्चित परिवर्तन आएगा। हमें सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जितना हमारा जीवन दूसरों के लिए होगा तो वो ईश्वरीय हो जाएगा। जितना हमारे जीवन में अहंकार होगा। उतना ही हम दुखी रहेंगे। बता दें कि चिन्मय मिशन की स्थापना सन 1953 में वेदांताचार्य स्वामी चिन्मयानंद महाराज के द्वारा की गई थी। वर्तमान में विश्वभर में मिशन के 300 से अधिक केंद्र है। जोधपुर में 13 अप्रैल 1976 में चिन्मय मिशन जोधपुर की स्थापना की गई थी। वर्तमान में इस केंद्र का दायित्व ब्रह्मचारिणी वृंदा चैतन्य निभा रही है।