जालोर के सिरे मंदिर तक पहली बार ट्रैक्टर से सामान पहुंचाया गया। ऊंची और दुर्गम पहाड़ी की करीब 800 सीढ़ियों पर एक ऑटोमाबाइल कंपनी ने यह परीक्षण किया। खास बात यह है कि संतुलन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाड़ी को रिवर्स गियर में ऊपर ले जाया गया। 1800 किलो वजन लेकर पहुंचा ऊपर ट्रैक्टर की क्षमता जांचने के लिए कंपनी और मंदिर प्रबंधन की ओर से दो बार टेस्टिंग की गई। दुर्गम पहाड़ी तक कैसे चढ़ा ट्रैक्टर, PHOTOS में देखिए… संतुलन बनाने के लिए जेसीबी का लोडर लगाया चढ़ाई के दौरान संतुलन बनाए रखने के लिए ट्रैक्टर के आगे जेसीबी का लोडर लगाया गया था। शुरुआत में तीन लोग भी इसपर सवार हुए थे। सीधा क्यों नहीं? रिवर्स गियर में चढ़ाने की यह रही वजह रेवदर के रहने वाले ड्राइवर गुलाब चंद माली बताते हैं- सीढ़ियों पर ट्रैक्टर को सीधे ले जाना बेहद जोखिम भरा होता है। ट्रैक्टर के आगे के टायर छोटे होते हैं। खड़ी चढ़ाई और सीढ़ियों पर सीधा चलाने से टायर हवा में उठ जाते हैं और ट्रैक्टर के पलटने का खतरा रहता है। रिवर्स गियर में चलाने से गुरुत्वाकर्षण और वजन का संतुलन बना रहता है, जिससे ट्रैक्टर सुरक्षित ऊपर चढ़ पाया। समय की बचत: डेढ़ घंटे का सफर 45 मिनट में सामान्य तौर पर एक श्रद्धालु को तलहटी से मंदिर तक 800 सीढ़ियां चढ़ने में करीब 1.5 घंटे का समय लगता है। गुलाब चंद ने अपनी कुशलता से 298 मीटर की ऊंचाई को मात्र 40 से 45 मिनट में तय कर लिया। यह रास्ता करीब 1.18 किलोमीटर लंबा और काफी दुर्गम है। अब मंदिर के कार्यों में होगा उपयोग यह ट्रैक्टर अब सिरे मंदिर में ही रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य मंदिर के निर्माण कार्यों और अन्य जरूरी सामान को नीचे से ऊपर तक पहुंचाना है। इस सफल परीक्षण के दौरान सिरे मंदिर के संत रविनाथ महाराज और रामेश्वर नाथ महाराज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। अब जानिए- मंदिर के बारे में …