जोजरी नदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIT की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- हमें जो बताया गया है, उसके अनुसार एसआईटी की जांच भी महज एक दिखावा है। 'लाइव लॉ' के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा-हम राज्य के हाथों लोगों को जहर नहीं दिए जाने देंगे। चाहे इसके कारण कितनी भी नौकरियां क्यों न चली जाएं, हम 20 लाख लोगों की जान की रक्षा करेंगे। कोर्ट में अब अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। जोजरी नदी मामला: सुप्रीम कोर्ट में बहस; पढ़िए कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ जस्टिस संदीप मेहता: हम राज्य के हाथों लोगों को जहर नहीं दिए जाने देंगे। चाहे इसके कारण कितनी भी नौकरियां क्यों न चली जाएं, हम 20 लाख नागरिकों की जान की रक्षा करेंगे। एएसजी राजू (सरकार के वकील): फैक्ट्रियों को बंद कर दिया है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जस्टिस संदीप मेहता: और वह कार्रवाई कौन करेगा? जब आपके अधिकारी जांच समिति को सच्चाई का पता लगाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे, तब आप क्या कर रहे थे? सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी (उद्योगों के वकील): उद्योगों ने अब अपना सबक सीख लिया है। जस्टिस संदीप मेहता: डॉ. सिंघवी, शायद आप इस गंभीर स्थिति को पूरी तरह नहीं समझ पा रहे हैं। सिंघवी: मैं सहमत हूं कि यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था। यह काम स्वेच्छा से किया जाना चाहिए था। जस्टिस संदीप मेहता (एएसजी राजू से): प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब तक क्या किया है? एएसजी राजू: उन्हें कुछ निर्देश जारी करने थे। मैं जांच करूंगा कि वे निर्देश जारी किए गए हैं या नहीं। जस्टिस संदीप मेहता: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आचरण गंभीर रूप से सवालों के घेरे में है। समिति की रिपोर्ट ने हमारे इस संदेह को और मजबूत किया है। जस्टिस संदीप मेहता: अगर जयपुर में 250 फैक्ट्रियों में से केवल 143 के पास ही संचालन की अनुमति है, तो आपका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड किस लिए बनाया गया है? यही सबसे बड़ा सवाल है। हम इसे रिकॉर्ड में दर्ज करेंगे और आपके मुख्य सचिव से इस पर सीधा जवाब मांगेंगे। जस्टिस संदीप मेहता: समिति ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 3 जुलाई तक जवाब देने के लिए कहा था। बोर्ड को इसका ठोस समाधान सामने लाना ही होगा। जस्टिस संदीप मेहता: हमें जो बताया गया है, उसके अनुसार SIT की जांच भी केवल एक दिखावा मात्र है।
यह है पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 16 सितंबर 2025 को स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट ने औद्योगिक कचरे और सीवरेज के कारण जोधपुर, पाली और बालोतरा की नदियों के जहरीले होने पर गहरी चिंता जताई थी। इसमें स्टील और टैक्सटाइल सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों की बड़ी भूमिका सामने आई थी। कोर्ट ने पाया कि पिछले दो दशकों से प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की विफलता के कारण करीब 20 लाख लोगों का जीवन, पशुधन और पर्यावरण गंभीर खतरे में है। राजस्थान की मौसमी नदियों में से एक जोजरी प्रदेश की एक प्रमुख मौसमी नदी है। यह नागौर जिले के पाण्डलू गांव की पहाड़ियों से निकलकर जोधपुर जिले में खेजड़ला खुर्द के पास लूनी नदी में मिलती है। पिछले कई सालों से जोधपुर, बालोतरा, जालोर और पाली जिलों की फैक्ट्रियों, खासकर टैक्सटाइल और स्टील री-रोलिंग यूनिट्स से निकलने वाला प्रदूषित पानी जोजरी नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी के किनारे बसे 50 से ज्यादा गांव और बस्तियां इससे सीधे तौर पर प्रभावित हैं।