भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा शहर के शास्त्रीनगर इलाके में ढीली हाईटेंशन लाइन के कारण करंट लगने से जान गंवाने वाली 15 साल की पूनम के परिवार को करीब 6 साल बाद न्याय मिला है। एडीजे कोर्ट-1 ने बिजली विभाग को जिम्मेदार मान माता-पिता को 6 लाख रुपए का मुआवजा दिलवाने के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट में बिजली निगम को क्लीन चिट दे दी गई थी। शास्त्रीनगर निवासी ओमप्रकाश शर्मा की 15 वर्षीय बेटी पूनम शर्मा 12-13 अगस्त 2020 की रात घर की बालकनी में खड़ी थी। उसी दौरान पास से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन से करंट स्टील रेलिंग में प्रवाहित हो गया। गंभीर रूप से झुलसी पूनम की इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जांच में सामने आया कि बिजली की लाइन घर की बालकनी से महज 2.5 फीट दूरी पर थी। तार नंगे (बिना इंसुलेशन) थे। लाइन पुरानी और जर्जर हालत में थी। हादसे के बाद विभाग ने उसी लाइन को बदलकर नई केबल डाली। कोर्ट ने माना कि यदि समय पर रखरखाव और शिफ्टिंग होती, तो हादसा टल सकता था। परिवार ने करीब 79.55 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी, लेकिन अदालत ने आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 6 लाख 4 हजार 7 रुपए मुआवजा मय 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया। कोर्ट ने नाबालिग की अनुमानित आय 30 हजार रुपए प्रतिवर्ष मानते हुए 15 का गुना लगाकर 4.5 लाख रुपए माना। वहीं इलाज खर्च, अंतिम संस्कार और परिजनों को मानसिक पीड़ा जोड़कर कुल राशि 6.04 लाख रुपए तय की गई। पीड़ित परिवार की ओर से एडवोकेट राजेश शर्मा एवं गौरव पालीवाल ने पैरवी की थी। ^ हमारी बेटी चली गई, जो वापस नहीं आ सकती। उसकी भरपाई कोई भी मुआवजा नहीं कर सकता। कोर्ट ने निगम को घटना के लिए जिम्मेदार माना, ये हमारे लिए न्याय की बड़ी जीत है। उस समय बड़ी तकलीफ होती थी, जब निगम के अधिकारी हादसे के लिए हमारी बेटी को ही दोषी ठहरा रहे थे। जन्माष्टमी का दिन था। बेटी छज्जे के पास आकर बाहर का माहौल देखने के लिए खड़ी थी। बस यही वो चंद पल थे, जिन्होंने पूनम को हमसे छीन लिया। - ओमप्रकाश-लालीबाई शर्मा पूनम के पिता-माता अपने ही अधिकारियों से जांच करवाकर निगम ने ले ली थी क्लीन चिट, बच्ची को ही बता दिया दोषी अजमेर विद्युत वितरण निगम ने हादसे के बाद अपने अधिकारियों से ही जांच करवाई। रिपोर्ट में कहा गया कि दुर्घटना के लिए निगम उत्तरदायी नहीं है। क्षतिपूर्ति राशि देय नहीं है। और तो और यहां तक कहा गया कि हादसे के लिए खुद जान गंवाने वाली बालिका पूनम दोषी है। इस रिपोर्ट ने बालिका के परिवार के जख्मों को और कुरेदने के साथ पीड़ा को दुगुना कर दिया था। माता-पिता ने कहा कि उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए, लेकिन कम से कम बेटी को तो दोष मत दो। कोर्ट ने साफ कहा कि बिजली लाइनों का रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है, भले ही मकान पहले या बाद में बना हो। निगम की जिम्मेदारी है कि नए मकान बनने और नवीनीकरण होने पर बिजली लाइनों को समय पर शिफ्ट करे। घटना के तुरंत बाद पुरानी लाइनों को बदलकर नई लगाई गई। इससे साफ है कि विभाग का उत्तरदायित्व बनता है।