अलवर में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली व वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने ज्योतिराव फुले जयंती के अवसर पर महिला शिक्षा के संघर्षपूर्ण इतिहास को याद किया। जूली ने कहा कि जब सावित्री बाई फुले पढ़ाने जाती थीं, तब उन पर गोबर फेंका जाता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जूली ने कहा कि ऐसे ही विरोध और चुनौतियों के बीच महिला शिक्षा की शुरुआत हुई, जिसे ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले ने अपने संकल्प से मजबूत बनाया। शनिवार को ज्योतिराव फुले जयंती पर उनकी प्रतिमा पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित सर्व समाज के लोगों ने माल्यार्पण किया। इस अवसर पर महात्मा ज्योतिराव फुले की पत्नी सावित्री बाई फुले को भी बराबर याद किया गया। पहली महिला टीचर के रूप में महिलाओं को पढ़ाने के प्रति उनके कठिन संघर्ष को कोई नहीं भूला सकता। ज्योतिराव फुले ने की महिला शिक्षा की शुरूआत नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि ज्योतिराव फुले ने महिला शिक्षा की शुरूआत की। उनकी पत्नी सावित्री बाई फुले पहली शिक्षक बनी। उस समय महिला शिक्षा की बात करना गुनाह था। सावित्री बाई फुले पढ़ाने जाती तो उन पर कीचड़ और गोबर फेंक दिया जाता था। इसकी वजह से उनको बाद में घर भी छोड़ना पड़ा। उन्होंने सामाजिक न्याय की बात की। पिछड़ों को आगे लाने की अलख जगाई जूली ने कहा कि केवल जाति व धर्म के आधार पर पढ़ने लिखने या व्यापार करने का अधिकार दिया जाना सही नहीं है। इस आवाज को आगे बढ़ाया। पिछड़ों को आगे लाने की अलख जगाई। उनके संघर्ष की बदौलत हम आगे भी आए हैं। वे चाहते थे कि सामाजिक, आर्थिक न्याय सबको मिले। उनके संघर्ष के बाद काफी बदलाव आ चुका है। बाबा साहेब का संविधान भी लागू हुआ है। हम उनके बताए कामों को आगे बढ़ाने में लगे हैं। यही सच्ची मानव सेवा है।