करौली में संविदा नर्सेज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 12 जून को राज्य सरकार के साथ बनी सहमति को तत्काल लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वर्गीय दीपक खारवाल के परिवार को घोषित आर्थिक सहायता और उनकी पत्नी को संविदा नियुक्ति अब तक नहीं मिली है। वहीं, सेवा से हटाए गए संविदा नर्सेज की बहाली और यूटीबी व आरएमआरएस के माध्यम से पुनर्नियुक्ति के आदेश भी जारी नहीं किए गए हैं, जिससे प्रदेशभर के नर्सेज में नाराजगी बढ़ रही है। सरकार को सहमति की याद दिलाई ज्ञापन में बताया गया कि 12 जून 2026 को राज्य सरकार और राजस्थान नर्सेज संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद अब तक इन निर्णयों पर कोई सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। नर्सेज संगठनों का कहना है कि इससे सरकार के आश्वासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं और संविदा नर्सेज में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। दीपक खारवाल के परिवार को राहत की मांग सहमति के अनुसार स्वर्गीय दीपक खारवाल के परिवार को सरकार की ओर से अधिकतम आर्थिक सहायता दी जानी थी। उनकी पत्नी करिश्मा को राजमेस के माध्यम से योग्यता के अनुसार संविदा पर नियुक्ति देने तथा परिवार को इंदिरा आवास और पालनहार योजना का लाभ दिलाने का भी आश्वासन दिया गया था। नर्सेज का कहना है कि इन बिंदुओं पर अब तक अमल नहीं हुआ है। हटाए गए नर्सेज की बहाली का मुद्दा ज्ञापन में कहा गया कि प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत जिन संविदा नर्सेज की सेवाएं समाप्त की गई थीं। उन्हें आवश्यकता के अनुसार यूटीबी (Urgent Temporary Base) और आरएमआरएस के माध्यम से दोबारा नियुक्ति देने पर भी सहमति बनी थी, लेकिन इस संबंध में भी अब तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। नर्सिंग स्टाफ की कमी का भी उठाया मुद्दा नर्सेज संगठनों ने कहा कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज, आरयूएचएस और प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की तुलना में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। ऐसे में चिकित्सा सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए सेवा से हटाए गए नर्सेज को प्राथमिकता के आधार पर यूटीबी के माध्यम से नियुक्त किया जाना चाहिए। भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग ज्ञापन में आगामी नियमित नर्सिंग भर्ती का विज्ञापन मेरिट बोनस के आधार पर जारी करने की मांग भी की गई है। साथ ही भविष्य में नर्सिंग कर्मियों की भर्ती प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से कराने की व्यवस्था को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग उठाई गई है। नर्सेज संगठनों ने जनहित और चिकित्सा सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार से सहमति के सभी बिंदुओं पर तत्काल आदेश जारी करने की अपील की है।