करौली में दलित समाज के लोगों ने विभिन्न मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने के विरोध में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट के सामने धरना-प्रदर्शन किया। समाज के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर लंबित मामलों में त्वरित कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। इस दौरान कलेक्ट्रेट में बड़ी संख्या में लोगों के घुसने के दौरान डीएसपी से गाली गलौच और धक्का-मुक्की हुई। वहीं, कुछ महिलाएं राष्ट्रीय राजमार्ग-23 पर बैठ गईं, जिससे यातायात बाधित हुआ। प्रदर्शन में दलित समाज ने विभिन्न मामलों में कार्रवाई न होने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने पहुंचा। कलेक्ट्रेट में बड़ी संख्या में लोगों के घुसने के दौरान डीएसपी अनुज शुभम से गाली गलौच और धक्का-मुक्की हुई। हालांकि बाद में पुलिसकर्मी और पूर्व विधायक सुरेश मीणा ने मामला शांत कराया। इसके बाद सौंपे गए ज्ञापन में आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जिले में दलित समाज के लोगों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। समाज का कहना है कि प्रशासन को कई बार ज्ञापन और शिकायतें देने के बावजूद संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उनमें आक्रोश है। प्रतिनिधियों ने हाल ही में दर्ज हुए कई मामलों का उल्लेख किया, जिनमें उनके अनुसार अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने सभी लंबित मामलों में त्वरित कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित पक्षों को न्याय दिलाने की मांग की। इसके अतिरिक्त एक विशेष मामले में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सार्वजनिक जुलूस निकालने की भी मांग रखी गई। धरना-प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग-23 पर कुछ महिलाएं बैठ गईं। इससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद महिलाओं को सड़क से हटाकर यातायात बहाल कराया। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि तीन दिनों के भीतर लंबित मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो जाटव एवं बैरवा समाज उग्र आंदोलन करेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।