करौली के 29वें जिला स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में जिले के समग्र विकास का व्यापक खाका सामने आया। वक्ताओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी, स्थानीय रोजगार सृजन, रेल कनेक्टिविटी, कृषि, उद्योग, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं जैसे अहम मुद्दों पर ठोस सुझाव दिए। उन्होंने प्रशासन से इन सुझावों को योजनाओं में शामिल कर प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की गई। जिले के विकास पर व्यापक मंथन पंचायत समिति सभागार में आयोजित संगोष्ठी में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लखन सिंह सहित शहर के गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। सभी ने जिले के समग्र विकास को लेकर अपने सुझाव रखे। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ऐसे आयोजनों में आने वाले सुझाव केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं, बल्कि उन्हें योजनाओं का हिस्सा बनाकर जमीन पर उतारा जाए। उच्च शिक्षा के लिए मजबूत संस्थानों की जरूरत आशीष कांत शर्मा ने जिला मुख्यालय पर उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि राजकीय महाविद्यालय में कई स्नातकोत्तर विषय उपलब्ध नहीं हैं। करौली का इंजीनियरिंग कॉलेज भी भरतपुर से संचालित हो रहा है, जबकि जिला गठन के 29 वर्ष बाद भी विधि महाविद्यालय की स्थापना नहीं हो सकी है। शर्मा ने कहा कि बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर भूपेन्द्र भारद्वाज ने कहा कि जिले के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने औषधीय गुणों वाली फसलों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे। रेल कनेक्टिविटी में तेजी लाने की मांग वेणु गोपाल शर्मा ने करौली को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि रेलवे लाइन को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन परियोजना के कार्यों में तेजी लाकर इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए, ताकि जिले के विकास को नई गति मिल सके। पर्यटन, उद्योग और कृषि में बड़ी संभावनाएं संगोष्ठी में जिले के सैंडस्टोन उद्योग, कृषि, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं का मानना था कि इन क्षेत्रों का सुनियोजित विकास करौली की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। प्रभावी क्रियान्वयन पर रही सबसे बड़ी अपेक्षा वक्ताओं ने प्रशासन से विकास कार्यों की नियमित निगरानी और सुझावों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार संगोष्ठी में आए सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें अमल में लाया जाएगा। संगोष्ठी में चंद्रेश गुप्ता, मदन मोहन स्वामी, राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रफीक अहमद, अमित शर्मा, व्याख्याता राम अवतार मीणा सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।