खैरथल-तिजारा में मंगलवार को युवाओं को नशे और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र व्यास के मार्गदर्शन में "ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे" कार्यक्रम के तहत मुख्य आयोजन खैरथल के निजी स्कूल में हुआ। यहां छात्रों को एनडीपीएस एक्ट, नशे के दुष्परिणामों और साइबर सुरक्षा पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। एनसीसी कैडेट्स ने दी सलामी कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल के एनसीसी कैडेट्स द्वारा अतिथियों को सलामी देने के साथ हुआ। इसके बाद मां शारदा की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य वक्ता और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अजीत कुड़ी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, शिक्षा, करियर और सामाजिक जीवन को भी नष्ट कर देता है। उन्होंने बताया कि युवा अक्सर जिज्ञासा, गलत संगति, मित्रों के दबाव, तनाव, अवसाद और सोशल मीडिया के प्रभाव में नशे की ओर आकर्षित होते हैं। इसकी शुरुआत भले ही शौक के तौर पर हो, लेकिन धीरे-धीरे यह एक गंभीर लत में बदल जाती है। कुड़ी ने एनडीपीएस एक्ट, 1985 के प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मादक पदार्थों के उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण और सेवन जैसे अपराधों के लिए कठोर कारावास और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है। अपराध की प्रकृति और बरामद मादक पदार्थ की मात्रा के आधार पर सजा और जुर्माना निर्धारित किया जाता है। उन्होंने छात्रों को चेतावनी दी कि नशे से संबंधित किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल होने पर गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अजीत कुड़ी ने छात्रों को नशे से बचाव के लिए व्यावहारिक उपाय भी सुझाए। उन्होंने सलाह दी कि अच्छी संगति का चुनाव करें, किसी भी प्रकार के नशे को "सिर्फ एक बार" की सोच के साथ भी न आजमाएं। मानसिक तनाव होने पर परिवार, शिक्षकों या विशेषज्ञों से खुलकर बात करें तथा खेल, योग और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ें। यदि किसी परिचित में नशे की लत दिखाई दे तो उसे समय रहते उपचार और परामर्श के लिए प्रेरित करें। साइबर सुरक्षा पर दिया जोर शिविर में साइबर सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। छात्रों को फर्जी लिंक, ओटीपी, क्यूआर कोड, ऑनलाइन निवेश, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी लोन, सोशल मीडिया हैकिंग और बैंकिंग फ्रॉड जैसे बढ़ते साइबर अपराधों के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें सलाह दी गई कि बैंक खाते, एटीएम, यूपीआई और सोशल मीडिया से जुड़े पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश से सतर्क रहें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी गई। अभियान के तहत खैरथल के अलावा भिवाड़ी, किशनगढ़बास, कोटकासिम, मुण्डावर और तिजारा सहित जिले के विभिन्न न्यायालय क्षेत्रों में भी न्यायिक अधिकारियों ने विद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर हुए। इस दौरान छात्रों को नशा मुक्ति, साइबर सुरक्षा और कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के साथ स्कूलों में "कोर्ट वाली दीदी" शिकायत पेटिका भी स्थापित की गई। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने कानूनी अधिकारों, साइबर अपराधों और नशा मुक्ति से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका अजीत कुड़ी ने सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के साथ जवाब दिया। उन्होंने छात्रों से स्वयं कानून का पालन करने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कनिष्ठ सहायक रविंद्र कुमार, पीएलवी सूरजभान कछवाहा, स्कूल स्टाफ, एनसीसी कैडेट्स एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।