खैरथल-तिजारा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बलराम यादव ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनसुनवाई का बहिष्कार करते हुए कहा कि बिना कानून का मसौदा सार्वजनिक किए किसी भी प्रकार की जनसुनवाई आयोजित करना लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शी शासन व्यवस्था के विपरीत है। जनसुनवाई केवल औपचारिकता-बलराम यादव बलराम यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अभी तक यूसीसी का कोई आधिकारिक प्रारूप जनता के सामने प्रस्तुत नहीं किया है। न तो कानून के प्रस्तावित प्रावधान सार्वजनिक किए गए हैं और न ही किसी पोर्टल अथवा अन्य माध्यम से नागरिकों को उनका अध्ययन कर सुझाव देने का अवसर दिया गया है। ऐसी स्थिति में जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है, क्योंकि जब लोगों को यह जानकारी ही नहीं होगी कि प्रस्तावित कानून में क्या प्रावधान हैं, तो वे सार्थक सुझाव या आपत्तियां कैसे प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण कानून पर जनसुझाव लेने से पहले उसका मसौदा सार्वजनिक करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। इससे समाज के सभी वर्गों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलता है तथा कानून निर्माण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जनभागीदारी पर आधारित बनती है। वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने का तरीका बताया बलराम यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता का ध्यान प्रदेश की वास्तविक समस्याओं से हटाने के लिए ऐसे संवेदनशील मुद्दों को आगे ला रही है। उन्होंने कहा कि धर्म,जाति और जनजाति जैसे विषयों पर राजनीति कर समाज में वैमनस्य का वातावरण बनाना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए उचित नहीं है। कांग्रेस पार्टी ऐसे हर प्रयास का विरोध करती है जिससे प्रदेश की सामाजिक समरसता,भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका हो। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के सामने अनेक गंभीर चुनौतियां हैं। सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है,नकली दवाइयों के कारण मरीजों की मृत्यु जैसी दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रदेश का युवा रोजगार के लिए भटक रहा है और पेपर लीक जैसी घटनाओं से उसका भविष्य प्रभावित हो रहा है। किसान बीज एवं यूरिया की कमी से परेशान हैं, कृषि विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं तथा अनेक क्षेत्रों में पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी गंभीर अभाव बना हुआ है।