कोटा में एसीबी कोर्ट ने 14 साल पुराने मामले में तत्कालीन सरकारी वकील को 3 साल की जेल और 50 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। सरकारी वकील हरि सिंह पर महिला थाने में दर्ज दहेज केस में नाम निकलवाने की एवज में रिश्वत मांगने और काम में कोताही बरतने का आरोप था। हरि सिंह ग्राम अतरामपुरा, पोस्ट चटोली तहसील वैर, जिला भरतपुर निवासी है। हरिसिंह ने पुलिस के नाम से दहेज केस से नाम निकलवाने की एवज में 5 हजा र रुपए रिश्वत मांगी थी। कोर्ट ने मामले में 10 अप्रैल को फैसला सुनाया। क्या था पूरा मामला? 16 नवंबर 2011 को परिवादी ओम प्रकाश वैष्णव (निवासी सांगोद, कोटा) ने एसीबी चौकी कोटा में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी भाभी ने दहेज की शिकायत पर उनके बड़े भाई और माता-पिता पर केस कर दिया था। पुलिस ने भाई को गिरफ्तार कर लिया और माता-पिता को थाने में बिठा लिया। थानेदार और सिपाहियों ने माता-पिता को छोड़ने की एवज में 15 हजार रुपए मांगे। दो दिन की मोहलत के बाद पैसे का इंतजाम करने को कहा गया। फिर जमानत के समय भी 2 हजार रुपए एक्स्ट्रा वसूले गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। परिवादी ने आरोप लगाया कि 15 नवंबर 2011 की शाम पिता के मोबाइल पर सरकारी वकील हरि सिंह मीणा का फोन आया। उन्होंने साफ कहा- “पुलिस ने आपको और आपकी पत्नी को गलत मुलजिम बनाया है। कल मेरे पास आ जाओ। मैं थानेदार को कुछ रुपये देकर तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी का नाम केस से निकलवा दूंगा।” परिवादी ने आरोप लगाया कि सभी की जमानत हो चुकी थी, फिर भी सरकारी वकील 5 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। एसीबी ने किया ट्रैप एसीबी ने शिकायत की जांच की जिसमें हरिसिंह द्वारा केस में से नाम निकलवाने की एवज में पुलिस के नाम से 5 हजार की रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। जिसके बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। आरोपी ने परिवादी से अपने सरकारी आवास पर थानेदार से मीटिंग करवाने की बात कही और परिवादी को अपने साथ घर ले गया। घर पर पहुंचने पर सरकारी वकील ने बताया थानेदार इंतजार करके चले गए। इस पर परिवादी ने थानेदार का नंबर मांगा। आरोपी ने नंबर नहीं होने की बात कही। परिवादी ने भी रिश्वत की रकम सरकारी वकील को नहीं दी। इस कारण ट्रैप की कार्रवाई नहीं हो सकी। जिस पर एसीबी की टीम ने बिना नंबर की प्रथम सूचना रिपोर्ट तैयार कर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जयपुर मुख्यालय भेजी। मुख्यालय से 12 जुलाई 2012 को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट में 19 गवाह व 30 से ज्यादा डॉक्यूमेंट पेश किए गए।