कोटा-बूंदी जिले में धान और सोयाबीन की सूखती फसलों को बचाने के लिए नहरों में पानी बढ़ाने की मांग कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिली है। किसानों की मांग के बाद सीएडी प्रशासन और सरकार ने नहरों में पानी बढ़ा दिया है। संभागीय आयुक्त, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त और सीएडी अधिकारियों ने आज किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इसके बाद नहरों में पानी का प्रवाह बढ़ाने की घोषणा की गई। महज दस दिनों में यह दूसरी बार है, जब लोकसभा अध्यक्ष की पहल पर मध्यप्रदेश सरकार ने गांधी सागर बांध से सीधे कोटा-बून्दी क्षेत्र के किसानों के लिए अतिरिक्त सिंचाई जल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस साल कमजोर मानसून के कारण राणा प्रताप सागर बांध का जलस्तर सामान्य से कम रहने से नहरों में पर्याप्त पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। इस निर्णय के बाद क्षेत्र की नहरों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा, जिससे खरीफ फसलों को समय पर सिंचाई मिल पाएगी। तात्कालिक राहत के रूप में राणा प्रताप सागर बांध से सोमवार को 1000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी भी छोड़ा गया है। नहरों में पानी का प्रवाह बढ़ाया बाईं मुख्य नहर (LMC) SE हरेत लाल मीणा ने बताया कि प्रशासन ने राणा प्रताप सागर और गांधी सागर बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग स्वीकार कर ली गई है। प्रशासन के निर्देश पर शाम 5 बजे नहरों में पानी का प्रवाह बढ़ाया है। बाईं मुख्य नहर में पहले 700 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, जिसे बढ़ाकर 1300 क्यूसेक किया है। दाईं मुख्य नहर (RMC ) में 1050 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, जिसे बढ़ाकर 1500 क्यूसेक किया है। नहरों में पानी बढ़ने से बूंदी और के. पाटन क्षेत्र की 80 हजार हेक्टेयर से अधिक धान की फसल को लाभ मिलेगा। कम पानी के कारण किसानों के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही थी, लेकिन अब नहरें पूरी क्षमता से चलने पर हर किसान तक पानी पहुंचने की उम्मीद है। धान और सोयाबीन की फसलें सूखने की कगार पर थीं। इससे पहले युवा किसान नेता गिर्राज गौतम की अगुवाई में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मुलाकात की। गौतम ने बताया कि नहरें पूरी क्षमता से नहीं चलने के कारण वितरिकाओं और माइनरों तक पानी नहीं पहुंच रहा था। इससे खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंचने से धान और सोयाबीन की फसलें सूखने की कगार पर थी। भूजल स्तर गिरने से ट्यूबवेल भी हवा फेंक रहे थे। किसानों का खर्च बढ़ रहा था और फसल बचाना मुश्किल हो गया था।