कृषि सिंचाई को लेकर कोटा क्षेत्र के किसानों का आक्रोश एक बार फिर बढ़ता नज़र आ रहा है। किसानों का आरोप है कि आंदोलन के दबाव में सीएडी (CAD) प्रशासन ने 10 जुलाई को नहरों में पानी तो छोड़ दिया, लेकिन गांधी सागर बांध से पर्याप्त पानी की व्यवस्था किए बिना ही नहरें चालू कर दी गईं। इसका परिणाम यह हुआ कि नहरें अब तक पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं और वितरिकाओं (distributaries) तथा माइनरों तक पानी नहीं पहुँच रहा है। युवा किसान नेता गिर्राज गौतम ने बताया- राणा प्रताप सागर में पानी की कमी है, लेकिन गांधी सागर बांध में पर्याप्त जल उपलब्ध है। किसानों की मांग है कि खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए गांधी सागर बांध से 6 फीट पानी छोड़ा जाए, जिससे करीब 70 दिनों तक सिंचाई सुचारू रूप से चल सके और हेड से लेकर टेल (आखिरी छोर) तक के सभी किसानों को इसका लाभ मिल सके। गौतम ने आरोप लगाया कि दाईं मुख्य नहर में लगभग 1500 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 500 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है। इससे किसानों के बीच पानी को लेकर आपसी विवाद की स्थिति भी बन रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही नहरों को पूरी क्षमता से नहीं चलाया गया, तो खरीफ की फसलें सूख सकती हैं। किसानों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो उन्हें दोबारा उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। आगामी रणनीति तय करने के लिए 17 जुलाई को आड़ा गेला बालाजी मंदिर परिसर में किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।