कोटा में नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है। किसान दोपहर 12 बजे से संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। किसानों का कहना है कि कांग्रेस-बीजेपी को वोट देने वाले धरती पुत्रों की फसलें सूख रही हैं। इसका दोष प्रशासन को लगेगा। इधर किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए सीएडी (चंबल एरिगेशन डिपार्टमेंट) प्रशासन ने सरकार को चिट्ठी भेज पानी छोड़ने की मांग की। वहीं किसानों ने नहरों में पानी नहीं छोड़ने पर हाईवे जाम की चेतावनी दी है। किसान नेता गिर्राज गौतम ने बताया कि आज अतिरिक्त संभागीय आयुक्त कुशल कोठरी और सीएडी अधिकारियों ने किसानों के साथ बैठक की है। उन्होंने बताया कि नहरों में पानी छोड़ने की मांग राजस्थान सरकार भेज दी है। साथ ही कल संभागीय आयुक्त और सीएडी अधिकारियों से निर्णायक वार्ता होगी। अनिश्चितकालीन धरने और हाईवे जाम की चेतावनी गौतम ने कहा की प्रशासन, किसानों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। खेतों में किसानों की फसल सूख रही है। प्रशासन किसानों की मांग पर ध्यान नहीं दे रहा। किसान नहरों में पानी लिए बिना पीछे नहीं हटेगा। जो जनप्रतिनिधि और नेता किसानों का साथ नही दे रहा। उसका हिसाब किसान आने वाले समय में करेगा, क्योंकि इन्हीं धरतीपुत्रों ने भाजपा व कांग्रेस को वोट दिया है। इस समय सभी को किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए। गिर्राज गौतम ने कहा-किसान आज शाम 5 बजे तक धरना देंगे। कल की वार्ता में किसानों के पक्ष में कोई निर्णय नहीं निकला, नहरों में तुरंत पानी नहीं छूटा तो किसान बर्बाद हो जाएगा। जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। सरकार ने मांगे नही मानी तो अनिश्चितकालीन पड़ाव डाला जाएगा और कोटा के सभी हाइवे भी जाम किए जाएंगे। ---- ये खबर भी पढ़े… किसानों ने नहरी पानी की मांग को लेकर दी गिरफ्तारियां:कोटा बैराज की तरफ कूच करते समय पुलिस ने रोका, धरने पर बैठे;दो दिन का अल्टीमेटम धान की फसल बचाने के लिए नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर शनिवार दोपहर को बूंदी जिले के किसान सड़कों पर उतर आए। किसान कोटा बैराज की ओर कूच कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। (पूरी खबर पढ़े)