कोटा में दादाबाड़ी श्रीकृष्ण मुरारी गोशाला और एसी वाले गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए चांदी के 13 छत्र बेचने की कोशिश के मामले में समिति अध्यक्ष का कहना है कि छत्र बेचने की कोशिश नहीं की गई थी। इनके बदले बड़ा छत्र और प्रतिमा के लिए पायजेब बनवानी थी। वहीं, मंदिर समिति में बिना प्रस्ताव पास कराए छत्र बेचने का विरोध हो रहा है। रविवार को समिति की बैठक भी होनी है। दरअसल, एसी वाले गणेश मंदिर में चढ़ाए गए छत्र को मंदिर समिति के अध्यक्ष सतीश गोपलानी ने केयर टेकर मोनू को दिए थे। समिति के सदस्य विरोध में उतरे मोनू इन छत्रों को बजरंग नगर में एक ज्वेलर्स के पास ले गया था। इसी दौरान कैथून इलाके में हनुमान मंदिर से छत्र चोरी की घटना की जांच कर रही पुलिस को मुखबिरों से पता लगा कि एक युवक ने बजरंग नगर में छत्र बेचे हैं। ऐसे में पुलिस मोनू तक पहुंची और उसे हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद जब पुलिस एसी वाले गणेश मंदिर समिति के अध्यक्ष के पास पहुंची तो उन्होंने बताया कि यह छत्र उन्होंने ही मोनू को दिए थे। इसके बाद पुलिस ने मोनू को छोड़ दिया। दूसरी तरफ समिति के सदस्य विरोध में उतर आए। उनका कहना था कि बिना समिति की मंजूरी छत्र को बेचना गलत है। इस मामले में सतीश गोपलानी ने बताया कि छोटे-छोटे चांदी के छत्र बेचकर बड़ा छत्र तैयार कराया जा रहा था। छोटे छत्र बेचकर बड़ा छत्र और पायजेब बनानी थी जब सतीश गोपलानी से सवाल किया गया कि छत्र बनवाना था, लेकिन मोनू ने तो पायजेब की बात सुनार को कही थी। इस पर गोपलानी ने कहा- मंदिर में झूलेलाल और श्री राम दरबार की मूर्ति की भी स्थापना होगी। इसलिए सभी छोटे छत्र बेचने के लिए दिए थे। उनके स्थान पर बड़ा छत्र बनाने के लिए कहा था। साथ ही रामदरबार में माता सीता की प्रतिमा भी स्थापित होगी। ऐसे में उनकी प्रतिमा के लिए पायजेब भी बनवानी है। यह छत्र बेचकर दूसरे छत्र और अन्य गहने बनाने के लिए समिति में प्रस्ताव नहीं रखा गया। इसे लेकर अब रविवार को चर्चा करेंगे। उन्होंने ये भी दावा किया कि कई सदस्यों को इसकी जानकारी भी थी।