कोटा में रावण दहन के दौरान आकर्षक नजारा देखने को मिला। 105 फीट के दशानन के सिर से आग निकलती रही और उसकी गर्दन घूमती रही। मेला परिसर में आतिशबाजी के बीच रावण का कुनबा महज 15 मिनट में जल गया। दशहरा महोत्सव की शुरुआत गढ़ पैलेस से पारंपरिक आयोजनों के साथ हुई। गढ़ पैलेस में पारंपरिक 'दरीखाना' सजाया गया। जिसमें हाड़ौती क्षेत्र के पूर्व ठिकानों के प्रतिनिधि अपनी पारंपरिक और राजसी वेशभूषा में सज धज कर शामिल हुए। ​दरीखाने में विशेष पूजा-अर्चना के बाद राजसी ठाठ बाठ के साथ लक्ष्मी नारायण जी की सवारी दशहरा मैदान पहुंची। विजयश्री रंगमंच के सामने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर,विधायक संदीप शर्मा, कल्पना देवी, कोटा नगर निगम महापौर सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। दशहरा मैदान में रावण दहन से पहले पूर्व राजपरिवार सदस्य इज्यराज सिंह ने विधि-विधान के साथ ज्वारा पूजन और सीता जी के पाने का पूजन किया। धार्मिक अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद पूर्व महाराव इज्यराज सिंह नाभि कलश में तीर चलाकर अमृत कलश को फोड़ा। इसके बाद रावण दहन का कार्यक्रम शुरू हुआ। कोटा में 15 मिनट में रावण का कुनबा जलकर राख हुआ। कोटा में इस बार 105 फीट का रावण खड़ा किया था, जबकि कुंभकर्ण और मेघनाथ 70-70 फीट के थे।