कोटा में नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनावी प्रक्रिया के तहत 100 वार्डों का प्रारंभिक गणित और व्यवस्थाओं का खाका तैयार कर लिया गया है। नवबंर 2025 के करीब 9 महीने बाद स्थानीय सरकार के चुनाव होने हैं, ऐसे में प्रशासन मतदाता सूची, मतदान केंद्र, वार्डवार व्यवस्थाओं और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। चुनावी हलचल के बीच राजनीतिक दलों ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ऐसे में भाजपा अपने कार्यकाल में हुए काम गिनाएगी तो कांग्रेस कई मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी में है। दरअसल, लंबे समय से लटके कोटा नगर निगम चुनावों को लेकर आखिरकार प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राथमिक स्तर पर कोर्ट में चुनावों की तारीखों की जानकारी देने के बाद निकाय चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। हालांकि, अभी निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की आधिकारिक तारीखों और विस्तृत समयसीमा की घोषणा होना बाकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब बैठकों और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के बाद फाइनल वोटर्स की लिस्टे अब जारी होने की उम्मीद है। बता दें कि नवंबर 2025 को पार्षदों और महापौर का कार्यकाल खत्म हो गया था। कोटा में पहले दो निगम उत्तर और दक्षिण थे। लेकिन अब एक ही नगर निगम कर दिया गया है। ऐसे में इस बार एक ही बोर्ड चुना जाएगा। नवंबर 2025 से 9 महीने बाद पार्षदों और महापौर को चुना जाएगा। 100 वार्डों का गणित तैयार चुनावों के आधिकारिक नोटिफिकेशन से पहले ही बुनियादी ढांचा दुरुस्त किया जाना है। कोटा नगर निगम में इस बार 100 वार्डों के नए सीमांकन के आधार पर चुनावी बिसात बिछाई जाएगी। वार्डवार मतदाता सूचियों को अपडेट करने, भौतिक सत्यापन और पोलिंग बूथों के निर्धारण का काम अब होना है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही आयोग से तारीखों की अंतिम अधिसूचना जारी होगी, चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इधर, निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही कोटा के राजनीतिक दल भी अब इलेक्शन मोड में आ रहे हैं। बूथ स्तर के कार्यकर्ता और संगठन चुनावों के लिए तैयार भाजपा नेताओं के अनुसार, पिछले ढाई साल से सरकार और पार्टी जनहित को सर्वोपरि मानकर काम कर रही है। शहर के विकास को नए आयाम दिए गए हैं। इसी के आधार पर बूथ स्तर के कार्यकर्ता और संगठन चुनावों के लिए तैयार है। भाजपा केंद्र और राज्य सरकार के ढाई साल के कार्यकाल, विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दम पर जनता के बीच पैठ बनाने की रणनीति तैयार कर रही है। कांग्रेस कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरेगी वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस शहर की स्थानीय समस्याओं को लेकर आक्रामक है। कांग्रेस पार्टी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत, नाली-पटान, सफाई व्यवस्था, सीवरेज की नाकामी और टूटी सड़कों के मुद्दों को हथियार बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। स्थानीय मुद्दों पर ही तय होगी कोटा की सरकार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कोटा नगर निगम का चुनाव बड़े राष्ट्रीय या राज्यस्तरीय मुद्दों के बजाय शुद्ध रूप से स्थानीय विकास और जनसुविधाओं के इर्द-गिर्द घूमेगा। पिछले कार्यकाल के अधूरे प्रोजेक्ट्स, सड़कों की हालत और सफाई व्यवस्था मतदाताओं के निर्णय में अहम भूमिका निभाएंगे। जैसे-जैसे चुनाव आयोग की आधिकारिक तारीखों का समय नजदीक आएगा, कोटा में वार्ड स्तर पर बैठकों, जनसंपर्क अभियानों और राजनीतिक आंदोलनों का शोर और तेज होना तय है।