कोटा में नगर निगम की सख्ती का असर निगम के राजस्व पर भी नजर आने लगा है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में 19.05 करोड़ रुपए से अधिक की नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) वसूली कर निगम ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। खास बात यह है कि 2007 में कर लागू होने के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी वसूली है। यानी 19 साल में पहली बार निगम बकायेदारों से शहर में इतनी वसूली कर सका है। जबकि हर साल निगम की तरफ से यूडी टैक्स वसूली के लिए टार्गेट तय कर बकायेदारों से अपील की जाती रही है। इन बकायेदारों में शहर के बडे रेस्टोरेंट, होटल, मैरिज हॉल, हॉस्टल समेत कई प्रतिष्ठान है। लेकिन ज्यादातर की तरफ से नगरिय कर जमा ही नहीं करवाया जाता था। नगर निगम ने इस बार केवल अपील तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बकायेदारों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की। आकाश मॉल और कैथून स्थित वेयरहाउस सहित एक दर्जन से अधिक संपत्तियों को सीज किया गया। जिससे बकायेदारों में मैसेज गया कि टैक्स नहीं देने पर अब सीधे नुकसान झेलना पड़ेगा। इसका असर यह हुआ कि जो लोग लंबे समय से यूडी टैक्स नहीं भर रहे थे, वे खुद आगे आकर बकाया जमा कराने लगे। निगम ने 2025–26 के लिए 18 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था, जिसे शुरुआत में कठिन माना जा रहा था। निगम ने इसके लिए बकायेदारों की पहचान की गई और लगातार फॉलोअप किया गया। आखिरी दिन सोमवार को शाम 7 बजे तक 1.05 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी थी। आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा के अनुसार, यूडी टैक्स नगर निगम की आय का प्रमुख स्रोत है, जिससे शहर में सड़क, पानी, सफाई और अन्य आधारभूत सुविधाओं पर खर्च किया जाता है। निगम अब इस मॉडल को आगे भी जारी रखने की तैयारी में है। वित्तीय वर्ष 2026–27 में अप्रैल से ही हर महीने के लक्ष्य तय किए जाएंगे और नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि आखिरी समय का दबाव कम हो और वसूली लगातार बनी रहे।