कोटा के नांता स्थित राजकीय बालिका गृह में एक बार फिर खुशियों की शहनाई गूंजने वाली है। यहां रह रही दो अनाथ युवतियों के विवाह की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। उनके लिए पूरे राजस्थान में दूल्हे की तलाश की जा रही है। खास बात यह है कि इन बेटियों के लिए केवल राजस्थान के युवकों से ही आवेदन मांगे जा रहे हैं। बालिका गृह प्रशासन ने विवाह प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाया है। इच्छुक युवक 10 मई तक विभागीय वेबसाइट से आवेदन प्रारूप लेकर अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। अब तक पांच युवकों के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि 50 से अधिक पूछताछ कॉल्स भी आ चुकी हैं। विवाह प्रस्ताव के तहत एक युवती की उम्र 19 साल और दूसरी की 21 साल है। दोनों ने आठवीं तक शिक्षा प्राप्त की है। घरेलू कार्यों के साथ-साथ सिलाई, बुनाई, कढ़ाई और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण भी लिया है, जिससे वे आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। नारी निकेतन की अधीक्षक अंशुल मेहंदीरत्ता के अनुसार, दोनों बालिकाएं लंबे समय से संस्थान में रह रही थीं। उन्होंने अपनी इच्छा से विवाह के लिए सहमति दी है। राज्य सरकार की योजना के तहत केवल राजस्थान के युवकों को ही इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, इसलिए राज्य के बाहर से आए प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा। पहले पूरी जांच फिर लेते हैं निर्णय अंशुल मेहंदीरत्ता ने बताया- विवाह से संबंधित बालिका की उम्र 18 साल से ज्यादा हो जाने पर विवाह संबंधी सहमति लेते हैं। बालिका गृह की युवती की सहमति मिलने पर विवाह उप समिति की बैठक में विवाह प्रस्ताव रखते हैं। वहां से अनुमोदन के बाद विज्ञप्ति जारी करते है। इसमें आए लड़कों के आवेदनों की छंटनी की जाती है। पूरी रिपोर्ट लेते हैं, जिसमें चरित्र व आय प्रमाण पत्र के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट और रोजगार संबंधी जानकारी लेते हैं। वहीं, परिवार और दूल्हे के संबंध में भी जानकारी लेते है। ये सब क्लियर होने के बाद इंटरव्यू होते हैं। इसके बाद बालिका को युवक दिखाए जाते हैं, सहमति जताने पर निर्णय लेते है। पहले भी हो चुकी हैं सफल शादियां अधीक्षक ने बताया- साल 2023 में तीन और 2025 में एक विवाह बालिका गृह से कराया जा चुका है। इनमें एक शादी सवाई माधोपुर और तीन कोटा में हुई थीं। सभी बालिकाएं अपने ससुराल में खुशहाल जीवन जी रही हैं और विभाग समय-समय पर उनकी स्थिति की रिपोर्ट भी लेता है। यह पहल न सिर्फ इन दो बेटियों के जीवन में नई शुरुआत का संदेश देती है, बल्कि समाज को यह भी दिखाती है कि संवेदनशील प्रशासन और सामूहिक प्रयास से हर बेटी का घर बसाया जा सकता है।