कोटा के सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की क्वालिटी कंट्रोल खंड (विंग) में कथित 15 लाख के गबन के मामले सहायक परीक्षण अधिकारी (ATO) विनय सक्सेना को निलंबन आदेश पर राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (RCSAT) ने सुनवाई के बाद फिलहाल रोक लगा दी है। अधिकरण ने कहा है कि कोटा में ही जहां से निलंबित किया गया, वहीं जोइन करवाया जाए। लेकिन आदेश के बावजूद 95 दिनों से मूल कार्यस्थल जोइन नहीं करने दिया गया है। अब संबंधित अधिकारी ने अधिकरण में कंटेप्ट प्रिटशन (अवमानना याचिका) दायर की है। गौरतलब है कि मटेरियल टेस्टिंग के सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच 59 फर्जी चालान विभाग में जमा हुए थे। ई ग्रास पोर्टल पर 59 चालान ऑन लाइन नहीं मिले। इनकी राशि भी सरकारी खाते में जमा नहीं हुई थी। यह राशि करीब 15 लाख रुपए थी। इस मामले के आरोप में विभाग ने (ATO) विनय सक्सेना को निलंबत कर दिया था। अधिकरण को पेश याचिका में सक्सेना ने कहा कि वह 15 लाख के फर्जी चालान के मामले को विभाग के सामने सबसे पहले लाया है। वह इस मामले को उजागर करने वालों में से है, उसे गलत निलंबित किया गया है। सक्सेना ने विभाग को इस घोटाले के मामले में उसके द्वारा मई, 2026 में विभाग और अधिकारियों को लिखे लेटर को पेश किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि उस पर चालान वेरिफाइ करने का आरोप है, लेकिन चालान वेरिफाइ का अधिकार उसके पास है ही नहीं। 59 में से 45 चालान तो उसके कार्यकाल से पहले के हैं। सक्सेना ने कहा कि उसके ऊपर लगातार चालान को सत्यापित करने का दबाव भी बनाया गया, लेकिन उसने मना किया क्योंकि यह उसके क्षेत्राधिकार का कार्य नहीं था। याची ने कहा कि उसे इस प्रकरण में गलत तरीके से जोड़ने का प्रयास किया गया है। सक्सेना ने याचिका में कहा कि उसने स्वयं कथित फर्जीवाड़े का पता लगाया, संबंधित कार्यालय को लिखित रूप से सूचित किया तथा जांच में डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराए। इसलिए उसके विरुद्ध आरोप तय करने से पहले उसके द्वारा की गई शिकायतों और उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की भी निष्पक्ष जांच की जाना आवश्यक है। याचिका में कहा कि किसी और का दोष उससे ऊपर थोपा जा रहा है। सक्सेना ने दावा किया कि चालानों की राजस्व की सूचना गत 2 वर्षों से बिना वेरिफिकेशन के मुख्य अभियंता कार्यालय में भिजवाई जा रही थी और आडिट ने भी सिर्फ खानापूर्ति करते इसे नजरअंदाज किया। सक्सेना ने आरोप लगाया कि उसने कंप्यूटर ऑपरेटर के फर्जीवाड़े का पूरा खुलासा किया और कंप्यूटर ऑपरेटर के ट्रांजैक्शन तक सक्सेना द्वारा विभाग को उपलब्ध करवाए गए थे।