लाडनूं में शिक्षा और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। यहां महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल (लाडनूं) और महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल (जयपुर) के शिक्षक और स्टाफ ने जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें गुरुदेव आचार्यश्री महाश्रमण जी से मुलाकात की। इस दौरान शिक्षकों ने आचार्यश्री और अन्य संतों से मिलकर उनका मंगल आशीर्वाद लिया। संतों के सान्निध्य से दोनों स्कूलों के स्टाफ में एक नई सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ। शिक्षक ही समाज को सही दिशा देता है: आचार्यश्री शिक्षकों को संबोधित करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण जी ने कहा- शिक्षा का असली मकसद सिर्फ बच्चों को साक्षर (पढ़ा-लिखा) बनाना नहीं है, बल्कि उनके भीतर नैतिकता, अहिंसा और मानवीय संवेदनाएं जगाना है। शिक्षक उस मूर्तिकार की तरह है जो विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण कर पूरे समाज को एक नई और सही दिशा देता है। इस दौरान साध्वी प्रमुखाश्री विश्रुतविभा जी, मुनिश्री महावीर कुमार जी, साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी और मुनिश्री कीर्ति कुमार जी ने भी शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। संतों ने कहा- स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला हैं, जहां बच्चों का सर्वांगीण विकास प्रेम और आत्मीयता के माहौल में होना चाहिए। प्रिंसिपल्स ने लिया बच्चों में संस्कार डालने का संकल्प दोनों स्कूलों की प्राचार्याओं (प्रिंसिपल्स) ने भी संतों के सामने अपने विचार रखे। लाडनूं स्कूल की प्रिंसिपल नीलिमा सिंह ने कहा- गुरुदेव से मिली यह आध्यात्मिक ऊर्जा बच्चों को एक बेहतर और संवेदनशील नागरिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, जयपुर स्कूल की प्रिंसिपल मधु शेखावत ने कहा- जयपुर से लाडनूं तक की यह यात्रा उनके लिए बेहद खास रही। वे अब स्कूल में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उच्च संस्कारों को भी जोड़ेंगी। प्रबंधन ने जताया आभार कार्यक्रम में मौजूद एजुकेशनल कन्वीनर गौरव जैन मांडोत, प्रवीण बराड़िया, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़ और सचिव सलिल लोढ़ा ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से शिक्षकों में सकारात्मकता आई है जो बच्चों के भविष्य को संवारने में काम आएगी। अंत में सभी शिक्षकों ने संतों के आशीर्वाद से शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने और एक अच्छे समाज के निर्माण का संकल्प लिया।