राजस्थान की विधानसभा में शनिवार को 18 देशों के नेता एक साथ बैठे। 17 बाहरी देशों के नेता सदन की कार्यप्रणाली व विधायी कार्यों के प्रश्न पूछते रहे और हमारे पहली बार की विधायक शिखा बराला, गोपाल शर्मा, गुरवीर सिंह आदि जवाब देते रहे। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, रफीकखान, कैलाश वर्मा, चंद्रभान आक्या जैसे विधायकों ने विधायी कार्यों पर प्रकाश डाला। विदेशी प्रतिनिधि तैयारी के साथ आए थे और पूछा कि महिला आरक्षण बिल पारित होने में दिक्कत क्यों आई? पारित होने की प्रक्रिया क्या है? क्या यह बिल पास हुआ तो महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा? हमारे विधायकों ने उनके सवालों के जवाब दिए। तंजानिया, केन्या और मलेशिया के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य के विषय, महिला आरक्षण, दल-बदल विरोध अधिनियम तथा प्राइवेट बिलों से संबंधित प्रश्न किए। विदेशी प्रतिभागियों और विधायकों के मध्य एक घंटे तक सवाल-जवाब का दौर चला। इस दौरान भारत के लोकतंत्र के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। स्पीकर वासुदेव देवनानी ने बांग्लादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया, जाम्बिया सहित 17 देशों के 43 प्रतिभागियों से परिचय किया और उनके साथ सामूहिक चित्र भी कराया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौजूद रहे। प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा, लोकसभा के प्राइड कार्यक्रम के निदेशक राजकुमार और कार्यक्रम निदेशक के. एम. चतुर्वेदी ने 37वें प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी। भूटान की नेशनल असेम्बली सचिवालय की विधायी अधिकारी फूर्पा डेमा ने कार्यक्रम को सराहा। विधेयक प्रस्ताव की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों से गुजरती स्पीकर देवनानी ने कहा कि किसी भी विधेयक का प्रस्ताव की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों से गुजरती है। उन्होंने कहा कि विधेयक सदन में प्रस्तुत किया जाता है। द्वितीय चरण में विधेयक पर गहन चर्चा के साथ मसौदे को बेहतर बनाने के लिए अक्सर विशेष समितियों की मदद से हर पहलू का बारीकी से विश्लेषण कराए जाने के बाद सदन मतदान के लिए एकत्रित होता है। कानून को सशक्त, समझने में आसान और वास्तव में जनता के हित में बनाने के लिए सम्पूर्ण प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक सुनिश्चित किया जाता है। स्पष्ट और सरल भाषा का प्रयोग ही न्याय का सार होता है। गुलाबी शहर का गुलाबी सदन स्पीकर ने कहा कि गुलाबी शहर जयपुर का गुलाबी सदन राजस्थान विधानसभा पूरे देश के लिए आदर्श बन गया है। विधानसभा ने सभी विधायी अभिलेखों को डिजिटाइज्ड करके सुदृढ भविष्य को सुनिश्चित कर लिया है। यह परिवर्तन केवल कम्प्यूटर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ाने और शासन को गति देने से भी संबंधित है। राजस्थानी शैली और आधुनिक आवश्यकताओं के अनूठे मिश्रण के साथ विधानसभा भवन को सुंदर तरीके से बनाया गया है। विदेशियों को भाया डिजिटल म्यूजियम विदेशी प्रतिभागियों ने राजस्थान विधान सभा के राजनैतिक आख्यान संग्रहालय की सराहना की। उन्होंने संग्रहालय को ज्ञानवर्धक एवं आकर्षक बताते हुए कहा कि इस प्रकार के संग्रहालय लोकतांत्रिक परंपराओं को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। प्रतिभागियों ने ऐसे संग्रहालय की सभी देशों में आवश्यकता जताई। पधारो म्हारे देश से स्वागत विदेशी मेहमानों का सदन में पधारो म्हारे देश की परंपरा से स्वागत किया गया। देवनानी ने विदेशी प्रतिभागियों से कहा कि राजस्थान विधानसभा के वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों के साथ चर्चा विधायी ज्ञान को बढ़ाएगी। ऐसे कार्यक्रम किताबों से परे जाकर अनुभव जानने के दुर्लभ अवसर हैं। कानून बनाना शासन की वैश्विक भाषा है, जिसे साझा करके हम सभी दुनियाभर में लोकतंत्र को मजबूत बनाने में सहभागी बनेंगे।