राजस्थान में घर बनाना और प्रॉपर्टी पर लोन महंगा हो गया है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा बैंक या वित्तीय संस्थानों से लिए जाने वाले होम लोन, कंस्ट्रक्शन लोन और मॉर्गेज डीड का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इससे सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लोन रजिस्ट्रेशन की भीड़ लग गई। सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में सुविधाएं बढ़ाए बिना व्यवस्थाएं बदलने से परेशानी खड़ी हो गई। जयपुर के 15 सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों में रोज 800-900 दस्तावेजों की रजिस्ट्रियां होती हैं, वहीं अब 700-750 लोन दस्तावेजों की रजिस्ट्रियां भी उसी स्टाफ को करनी होती हैं। ऐसे में लोन की प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री व लोन की रजिस्ट्री में 8 से 10 दिन का समय लगने लगा है। लोन देने वाले बैंक के संबंधित अधिकारी को लोन रजिस्ट्री के समय सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में बायोमेट्रिक उपस्थिति के लिए आना पड़ता है। सामान्य श्रेणी (पुरुष) के लिए है। महिलाओं के मामले में स्टाम्प ड्यूटी में 1% की छूट देय होती है, जिससे प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का खर्च थोड़ा कम हो जाता है। उदाहरण: ₹1 करोड़ की प्रॉपर्टी (फ्लैट) पर कुल सरकारी खर्च यदि आप 1 करोड़ का फ्लैट खरीदते हैं और उस पर 80% (₹80 लाख) का बैंक लोन लेते हैं, तो आपका अनुमानित खर्च इस प्रकार होगा: फ्लैट की रजिस्ट्री का खर्च (खरीद पर) स्टाम्प ड्यूटी (पुरुष/सामान्य): ₹6,00,000 (6%) पंजीयन शुल्क: ₹1,00,000 (1%) सरचार्ज 13 प्रतिशत, गॉसेस 10 प्रतिशत और लेबर सेस 10 प्रतिशत सहित: लगभग ₹1,98,000 (स्टाम्प ड्यूटी का 33%) कुल (A): ₹8,98,000 बैंक लोन (₹80 लाख) की रजिस्ट्री का खर्च पंजीयन शुल्क (0.5%): ₹40,000 स्टाम्प ड्यूटी: ₹4,000 सरचार्ज: ₹1,320 कुल (B): ₹45,320 इस प्रकार ₹1 करोड़ की प्रॉपर्टी (फ्लैट) पर दोनों को मिलाकर कुल सरकारी खर्च ₹9,43,320 बैठता है। 15 सब-रजिस्ट्रार ऑफिस, 378 करोड़ का राजस्व लोन की रजिस्ट्री दिसंबर 2025 से करना अनिवार्य किया था, गत 4 माह में सरकार को लोन की रजिस्ट्री करने पर अकेले जयपुर के 15 सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों से 378 करोड़ का लाभांश मिला है। नई व्यवस्था बनाम पुरानी व्यवस्था भास्कर एक्सपर्ट रजिस्ट्री कार्य से जुड़े अधिवक्ता देवेंद्र यादव और अखिलेश जोशी का कहना है कि सरकार का उद्देश्य सही हो सकता है, लेकिन बिना तैयारी के इसे लागू करना गलत है। यदि रजिस्टर्ड मॉर्गेज अनिवार्य करना ही था, तो इसके लिए अलग काउंटर और अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए थी। स्टाफ की कमी के कारण पेंडेंसी लगातार बढ़ रही है।