कर्नाटक के कृष्णागिरी में भगवान श्री पार्श्वनाथ की प्रतिमा निर्माण के लिए राजसमंद जिले से चार विशाल ग्रीन मार्बल ब्लॉक शनिवार को भारी माल वाहक ट्रेलरों में लोड किए गए। इनमें सबसे बड़े ब्लॉक का वजन करीब 140 मीट्रिक टन है, जबकि अन्य तीन ब्लॉकों का वजन 65 से 70 मीट्रिक टन के बीच है। केसरियाजी स्थित ग्रीन मार्बल माइंस से इन सभी ब्लॉकों को अलग-अलग हैवी ड्यूटी ट्रेलरों के जरिए कृष्णागिरी के लिए रवाना किया गया। आचार्य वसंत विजयानंद गिरि महाराज की प्रेरणा से हो रहा प्रतिमा निर्माण राजसमंद के कर्णावट ग्रुप के प्रबुद्ध कर्णावट ने बताया कि आचार्य वसंत विजयानंद गिरि महाराज की प्रेरणा से श्री पार्श्व पद्मावती सेवा ट्रस्ट, कृष्णागिरी की ओर से भगवान श्री पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिमा का निर्माण कराया जा रहा है। इसी प्रतिमा निर्माण के लिए माइंस से चार विशाल हरे संगमरमर के ब्लॉकों का चयन किया गया और उन्हें विशेष हैवी ड्यूटी ट्रेलरों के माध्यम से कृष्णागिरी के लिए रवाना किया गया। सबसे बड़े ब्लॉक का वजन 140 मीट्रिक टन प्रबुद्ध कर्णावट ने बताया कि चारों ब्लॉकों में सबसे बड़े ब्लॉक का वजन करीब 140 मीट्रिक टन है। इसके अलावा बाकी तीन ब्लॉकों का वजन 65 से 70 मीट्रिक टन के बीच है। इतने बड़े ब्लॉकों को सुरक्षित तरीके से लोड कर परिवहन के लिए तैयार करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण काम था। दो महीने से ज्यादा समय तक चली तैयारी इन ब्लॉकों की कटिंग, फिनिशिंग और परिवहन की तैयारियां ऋषभदेव स्थित विनीत उद्योग माइंस में दो महीने से ज्यादा समय तक चलीं। ब्लॉकों को तय आकार में तैयार करने और सुरक्षित तरीके से परिवहन योग्य बनाने के लिए लगातार काम किया गया। लोडिंग के लिए अहमदाबाद से मंगवाई गई 700 टन क्षमता की क्रेन विशाल ब्लॉकों की सुरक्षित लोडिंग के लिए अहमदाबाद से 700 टन क्षमता की विशेष क्रेन मंगवाई गई। इस क्रेन की मदद से ब्लॉकों को भारी माल वाहक ट्रेलरों पर लोड किया गया। विशेषज्ञों की निगरानी में पूरा किया गया काम कर्णावट ग्रुप के निदेशक प्रबुद्ध कर्णावट और प्रणय कर्णावट के अनुसार इतने विशाल ब्लॉकों का चयन, निर्माण और सुरक्षित परिवहन बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसे विशेषज्ञों की निगरानी और पूरी टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उन्होंने बताया कि यह केवल एक व्यावसायिक कार्य नहीं था, बल्कि श्रद्धा, सेवा और समर्पण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर भी था। इस सेवा कार्य में गजेंद्र जैन, राकेश मीणा, बाबू मीणा सहित पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।