सरकारी सिस्टम की बदहाली और उच्च शिक्षित युवाओं की मजबूरी का इससे बड़ा विरोधाभास क्या होगा कि जिन हाथों में चॉक-डस्टर और ब्लैकबोर्ड होना चाहिए था, वे आज सरकारी फाइलों की डिलीवरी करने, घंटी बजाने और स्कूलों की देखरेख के लिए चतुर्थ श्रेणी पदों पर तैनात हैं। लेकिन इस लाचारी के बीच इन युवाओं की काबिलियत और जज्बा देखिए कि जिले के दर्जनों सरकारी स्कूलों में जब शिक्षक छुट्टी पर होते हैं या पद खाली हैं, तो यही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बच्चों का भविष्य संवारने के लिए गुरुजी बन जाते हैं। डिग्री एमए, बीएड, बीएससी और एसटीसी की है, लेकिन तकदीर और व्यवस्था की नाकामी ने इन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बना दिया। इसके बावजूद इन्होंने निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया। किसी ने रीट में 125 अंक पाए, कोई दो नंबर से चूका युवराज कुमार (एमए, बीएड): राउमावि वीरपुरा में तैनात हैं। हाइट कम रहने से कांस्टेबल भर्ती से बाहर हुए और वीडीओ मेंस में 2 नंबर से रह गए। चतुर्थ श्रेणी में जॉइनिंग के बाद भी उन्होंने छठी-सातवीं के बच्चों को गणित-विज्ञान पढ़ाया। अब ‘सेकंड ग्रेड हिंदी शिक्षक’ के पद पर चयन। दलीचंद कुम्हार (बीए, एसटीसी) : राउमावि कुकड़ाखेड़ा में तैनात हैं। 12वीं के बाद ज्वेलरी शॉप पर नौकरी की और सुबह-शाम पढ़ाई की। रीट में 2-2 नंबर से चूके। अब स्कूल में 5वीं से 8वीं के बच्चों को पढ़ाकर शिक्षकों की कमी पूरी कर रहे हैं। दीपिका कलाल (बीएससी, बीएड): राउमावि टीडी में कार्यरत हैं। 2021 की रीट में 150 में से 125 अंक थे। मेरिट पक्की थी, लेकिन पेपर आउट होने से सपना टूट गया। मजबूरी में चतुर्थ श्रेणी पद चुना। दीपिका कहती हैं-हार नहीं मानी है, तैयारी जारी है। जब भी शिक्षक छुट्टी पर होते हैं, मैं छठी से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ाती हूं। इंदिरा खंडेरा (बीएससी, एसटीसी): राउमावि सरादीत (फलासिया) में तैनात हैं। स्कूल में टीचर नहीं होने पर वे तुरंत क्लास संभालती हैं। उनका कहना है-पद चतुर्थ श्रेणी का है, लेकिन काबिलियत और जज्बा मायने रखता है। मैं फिलहाल तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रही हूं। 10वीं पास योग्यता वाले पदों के लिए अभ्यर्थियों की फौज राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने बताया कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की चतुर्थ श्रेणी भर्ती में शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास रखी गई थी। लेकिन प्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति यह है कि 53 हजार से अधिक पदों के लिए बीई/बीटेक, एमबीए, एमए, बीएड और एमएड जैसी उच्च योग्यता वाले लाखों युवाओं ने आवेदन किया। सीएमएचओ कार्यालय में जब अभ्यर्थी मेडिकल और फिटनेस सर्टिफिकेट पर काउंटर सिग्नेचर कराने पहुंचे तो वहां मौजूद स्टाफ ने अजीबोगरीब शर्त रख दी। अभ्यर्थियों से 25 झाड़ू-पोछे मंगवाकर सफाई का ‘ट्रायल’ देने को कहा गया।