सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस ने रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर 2.12 करोड़ रुपए ऐंठने के मामले का रविवार शाम खुलासा किया। साइबर क्राइम पुलिस ने छापेमारी कर महाराष्ट्र में छिपे डिजिटल अरेस्ट के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। डिजिटल अरेस्ट गिरोह ने रिटायर्ड अधिकारी को 9 दिन तक मनी लॉड्रिंग में फंसाने व जेल भेजने की धमकी देकर टॉर्चर कर रुपए ऐंठे थे। पुलिस फिलहाल गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया- सेंट्रल साइबर क्राइम थाने में रिटायर्ड अधिकारी ने डिजिटल अरेस्ट कर 2.12 करोड़ रुपए ऐंठने का मामला दर्ज करवाया था। शिकायत में बताया- 9 अगस्त से 18 अगस्त के बीच साइबर क्रिमिनर्ल्स ने मोबाइल कॉल व वॉट्सएप के जरिए मुझ से कॉन्टैक्ट किया। खुद को पुलिस अधिकारी और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर धमकाया। गिरफ्तारी वांटर जारी होने और मनी लॉडिंग में फंसाने का डर दिखाया गया। वीडियो कॉल पर रहने और किसी व्यक्ति से कॉन्टैक्ट नहीं करने और लाइव लाकेशन चालू रखने के लिए कहा। 9 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर वॉट्सएप पर विभिन्न फेक डॉक्यूमेंट भेजकर जेल भेजने की धमकी देकर 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपए दो बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर करवाकर ठग लिए। महाराष्ट्र में दबिश देकर पकड़ा साइबर क्राइम थाना पुलिस की ओर से क्रिमिनर्ल्स के यूज किए बैंक अकाउंट्स, केवाईसी, मोबाइल नंबर की सीडीआर व अन्य तकनीकी सबूतों की जांच की गई इसके आधार पर साइबर क्रिमिनर्ल्स की पहचान कर महाराष्ट्र में छिपे होने का पता चला। बैंक अकाउंटस से लिंक मोबाइल नंबर की जांच में रोहित रेवण कटकधोंड और आंबादास कालू जाधव की भूमिका सामने आई। इनके साथ ही आमोल जगन्नाथ पवार की भूमिका भी सामने आई। पुलिस स्पेशल टीम ने महाराष्ट्र में दबिश देकर तीनों क्रिमिनर्ल्स रोहित रेवण कटकधोंड, आंबादास कालू जाधव और आमोल जगन्नाथ पवार निवासी महाराष्ट्र को अरेस्ट किया। ये रही तीनों की भूमिका 1. रोहित रेवण कटकधोंड - रोहित कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री का बिजनेस करता है। फर्म चलाता है। पूछताछ में बताया कि उसके पास इंटनेशनल मोबाइल नंबर से कॉल आया था। उसे चावल के ऑर्डर, 100% एडवांस इंटरनेशनल पेमेंट और कमीशन का लालच देकर बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया। कहे अनुसार मुंबई पहुंचने पर देवा नाम के व्यक्ति ने रोहित के बैंक खातों की नेट बैंकिंग आईडी-पासवर्ड, डेबिट कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लिए। देवा और उसके साथियों ने बैंक अकाउंट से कई लेन-देन किए। बैंक अकाउंट की लॉगिन आईडी व पासवर्ड बदल दिए। बैंक अकाउंट व ई-मेल आईडी का कोई एक्सेस नहीं रहा। इसके कारण बैंक अकाउंट से लेन-देन के बारे में कोई पता नहीं चल सका। 2. आमोल जगन्नाथ पवार - एक व्यक्ति ने कंपनी में निवेश के नाम पर 20 लाख रुपए और कंपनी के डॉक्यूमेंट लिए थे। इसके बाद बड़े बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए कंपनी को प्री-लिस्टेड कराने और प्रॉफिट दिलाने का झांसा देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने के लिए तैयार कर एक महिला से कॉन्टैक्ट करवाया। महिला ने खुद को सेबी शेयर मार्केट ऑफिस बांद्रा मुंबई से संबंधित बताकर आमोल से कॉन्टैक्ट किया। बैंक अकाउंट में बड़े ट्रांजेक्शन कराने के नाम पर इंटरनेट बैंकिंग शुरू करवाने और OTP उपलब्ध कराने के लिए कहा। आंबादास कालू जाधव के मोबाइल में एप डाउनलोड करवाकर OTP प्राप्त किए। कथित रूप से इंटरनेट बैंकिंग व बेनिफिशियरी जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद कंपनी के अकाउंट में प्राप्त बड़ी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने की जानकारी देकर कमीशन मिलने का आश्वासन दिया। आंबादास कालू जाधव पुराना पार्टनर होने के कारण वह बड़े ट्रांजेक्शन से प्रॉफिट होने के लालच में आ गया। उसके नाम से बैंक अकाउंट संचालित किया गया और उसके मोबाइल पर आने वाले OTP आरोपित महिला की ओर से प्राप्त किए गए। 3. आंबादास कालू जाधव - आंबादास कालू जाधव, आमोल पवार का परिचित और पूर्व में उसकी कंपनी में काम कर चुका था। शेयर बाजार में निवेश और बड़े बैंक ट्रांजेक्शन से लाभ का लालच मिलने पर वह प्लान में शामिल हुआ। 10 सितंबर को आमोल पवार की ओर से ओरिएंट मेटल्स के नाम पर बैंक की नासिक शाखा में आंबादास और आकाश को पार्टनर बनाकर बिजनेस अकाउंट खुलवाया गया और बैंक किट आमोल पवार को सौंप दी गई। इसके बाद कथित महिला ने बड़े ट्रांजेक्शन और मुनाफे का लालच देकर इंटरनेट बैंकिंग शुरू करवाने और OTP उपलब्ध कराने को कहा। उसके मोबाइल में एप डाउनलोड करवाकर OTP प्राप्त किए गए और इंटरनेट बैंकिंग व लाभार्थी जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की गई। 17 से 19 अगस्त के दौरान खाते में बड़ी रकम आने और अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर होने की जानकारी आंबादास के मोबाइल पर मिली, जिसे उसने आमोल पवार को बताया।