960 करोड़ के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में एसीबी ने सोमवार को कार्रवाई तेज करते हुए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को कोर्ट से जेल भिजवा दिया, जबकि उनके करीबी संजय बड़ाया को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया। कोर्ट ने बड़ाया को 13 मई तक एसीबी रिमांड पर भेजा है। डीआईजी रामेश्वर सिंह ने बताया कि बड़ाया थाईलैंड से परिवार के साथ लौट रहा था। उसके खिलाफ 10 मई को लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था। रविवार रात करीब डेढ़ बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन विभाग ने उसे रोककर एसीबी को सूचना दी। इसके बाद टीम सुबह उसे जयपुर लेकर पहुंची और कोर्ट में पेश किया। एसीबी ने कोर्ट में महेश जोशी की 3 दिन और संजय बड़ाया की 5 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने जोशी को जेल भेज दिया और बड़ाया को 3 दिन के रिमांड पर भेजा। कोर्ट में पेशी के दौरान महेश जोशी ने कहा कि राजनीतिक दबाव में पहले ईडी और अब एसीबी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि बिना नए तथ्यों के एक ही मामले में बार-बार कार्रवाई हो रही है। संजय बड़ाया के खिलाफ एलओसी जारी करने पर भी सवाल उठाए। ट्रांसफर से टेंडर तक दखल: जेजेएम घोटाले में ‘कोऑर्डिनेटर’ की भूमिका में था बड़ाया एसीबी सूत्रों के अनुसार संजय बड़ाया पूर्व मंत्री महेश जोशी और रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल का करीबी था। वह ठेकेदारों और विभाग के बीच समन्वय का काम करता था। खासतौर पर श्री गणपति ट्यूबवैल और श्री श्याम ट्यूबवैल से जुड़े मामलों में उसकी सक्रिय भूमिका बताई जा रही है। बड़ाया पर अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में दखल देने, टेंडर प्रक्रिया प्रभावित करने और ठेकेदारों के काम करवाने के बदले कमीशन सेटिंग कराने के आरोप हैं। एसीबी उसे पूरे घोटाले की अहम कड़ी मान रही है। फरार आरोपियों को भगोड़ा घोषित कराने की तैयारी, 5 की गिरफ्तारी पर रोक है मामले में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता मुकेश गोयल, अधिशाषी अभियंता जितेंद्र शर्मा और निजी व्यक्ति सजीव गुप्ता के खिलाफ स्थायी वारंट जारी हो चुके हैं। एसीबी अब इन्हें भगोड़ा घोषित कराने की तैयारी में है। वहीं रिटायर्ड चीफ इंजीनियर रमेशचंद मीणा, एडिशनल चीफ इंजीनियर आरके मीणा, ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल समेत 5 आरोपियों की गिरफ्तारी पर कोर्ट से रोक लगी हुई है। गहलोत ने कहा- एसीबी दबाव में, अफसरों के दो गुट बन गए हैं “पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने महेश जोशी की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। कहा- प्रदेश की एसीबी दबाव में काम कर रही है। एसीबी के डीजी ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, लेकिन उन पर दबाव है। एसीबी में अधिकारियों के दो गुट बन गए हैं। कुछ अधिकारी निष्पक्ष और ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, जबकि कुछ दबाव में हैं।”