जयपुर डिस्कॉम में हर साल प्री-मानसून और प्री-दीपावली मेंटेनेंस पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। इसके बावजूद बिजली की ट्रिपिंग, बार-बार फॉल्ट और घंटों बिजली गुल रहने की समस्या बनी हुई है। सवाल है कि मेंटेनेंस पर खर्च हो रहा पैसा आखिर कहां जा रहा है? ठेकेदारों ने धरातल पर कितना काम किया और कागजों में कितना दिखाया? अब ऊर्जा विभाग ने मेंटेनेंस कार्यों की तकनीकी और वित्तीय जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि जांच का दायरा सिर्फ जयपुर शहर के दो सर्किलों तक सीमित रखने पर सवाल उठ रहे हैं। जांच सिर्फ जयपुर शहर तक सीमित रखने पर इंजीनियरों ने नाराजगी जताई है। ऊर्जा सचिव आरती डोगरा ने सोमवार को आदेश जारी कर जयपुर सिटी सर्किल उत्तर और दक्षिण में एआरसी ठेकेदारों से कराए गए मेंटेनेंस कार्यों की जांच के लिए ऊर्जा सलाहकार नवीन अरोड़ा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। 33 और 11 केवी फीडरों से लेकर ट्रांसफॉर्मरों तक की जांच कमेटी चयनित 33 केवी और 11 केवी फीडरों, ट्रांसफॉर्मरों और एलटी नेटवर्क पर हुए कार्यों की जांच करेगी। मेंटेनेंस से पहले और बाद की ट्रिपिंग के आंकड़े भी जांचे जाएंगे। गंभीर सुरक्षा खामी या अनियमितता मिलने पर 24 घंटे में रिपोर्ट देनी होगी। सवाल यह भी है कि जब मेंटेनेंस की गुणवत्ता और खर्च की जांच जरूरी है तो इसे केवल जयपुर सिटी उत्तर-दक्षिण तक सीमित रखने का आधार क्या है? 1 माह में जांच, गड़बड़ी मिली तो रिकवरी अन्य जिलों में ऑडिट टीम समय-समय पर रैंडम जांच करती है। कमेटी बनाने का उद्देश्य गुणवत्ता बढ़ाना और पारदर्शिता लाना है। कमेटी में सभी विशेषज्ञ हैं। -आरती डोगरा, ऊर्जा सचिव व सीएमडी, डिस्कॉम्स