मादा एनाफिलीज मच्छर काटने से होने वाले मलेरिया का ग्राफ राजस्थान में तेजी से घट रहा है। राजधानी के एसएमएस अस्पताल में पिछले 4 साल से महज 3 से 4 मरीज सामने आ रहे हैं। वहीं, इस साल अब तक एक भी मामला सामने नहीं आया है। प्रदेश की बात करें तो 2025 में 1390 मरीज सामने आए, 2022 में 1565, जबकि 2023 और 2024 में 2200 से ज्यादा मिले थे। यानी 40 फीसदी कम मरीज मिले। नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल (एनसीवीबीडीसी) इसका कारण तेज गर्मी, शहरीकरण, जागरूकता और वेक्टर कंट्रोल में इस्तेमाल की जा रही एक्टिविटी है। बता दें कि मलेरिया का मच्छर गंदे पानी में ही पनपता है। मई से एप पर रिपोर्टिग, हर राज्य का पैटर्न पता कर सकेंगे राजस्थान समेत अब देशभर में मलेरिया केस मिलने पर रिपोर्टिंग करना आसान होगा। एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) ने एक एप बनाया है। इसमें एपीआई के देशभर में पंजीकृत 26 हजार डॉक्टर जांच में पॉजिटिव और किसी की डेथ की रिपोर्टिंग करेंगे। एपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ज्योतिर्मय पॉल व सचिव डॉ. पुनीत सक्सेना के अनुसार अगले माह से एप से मलेरिया केस की रिपोर्टिंग की जा सकेगी। इसमें हर राज्यों के बीमारी का पैटर्न, बदलाव, और कारण का भी पता भी लग सकेगा। मलेरिया की चार तरह की प्रजाति, प्रदेश में दो ही मिलती हैं “मलेरिया की 4 प्रजाति प्लाजमोडियम वाइवेक्स, फेल्सीपेरम, ओवेल और मलेरियाई होती है। राजस्थान में सिर्फ वाइवेक्स (पीवी) एवं फेल्सिपेरम (पीएफ) ही मिलती है। वाइवेक्स की तुलना में फेल्सिपेरम ज्यादा खतरनाक होता है। जांच में पीवी पॉजिटिव पाए जाने पर 14 दिन और पीएफ का 3 दिन तक इलाज लेना पड़ता है।” भास्कर एक्सपर्ट- डॉ. प्रवीण मंगलूनिया, डॉ. प्रवीण कनोजिया प्रदेश में मलेरिया नियंत्रण में स्रोत - NCVBDC/स्वास्थ्य मंत्रालय की मलेरिया वार्षिक रिपोर्ट, 2025 का डेटा अक्टूबर तक का। नोट - फाल्सीपेरम मलेरिया (PF) को गंभीर श्रेणी माना जाता है। वाइवेक्स मलेरिया (PV) बुखार बार-बार लौट आता है।