शहर में 68 मैरिज होम संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश शहर के लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। सरकारी गाइडलाइंस और नगर निगम के नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे इन मैरिज होम में पार्किंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान मेहमानों के वाहन मुख्य सड़कों पर खड़े कर दिए जाते हैं। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारों की वजह से शहर के प्रमुख रास्तों पर बार-बार जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है, लेकिन विडंबना यह है कि इस गंभीर समस्या की ओर न तो नगर निगम प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही ट्रैफिक पुलिस की ओर से कोई सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार मैरिज होम के लिए स्वीकृत ले-आउट प्लान में कुल भूखंड क्षेत्रफल का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा पार्किंग के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि पार्किंग व्यवस्था आवेदन स्थल पर स्वयं के खर्च पर और सुरक्षित होनी चाहिए। इसके बावजूद धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। अधिकतर संचालकों ने पार्किंग के लिए निर्धारित जगह पर भी अन्य निर्माण कर लिए हैं, जिससे वाहन सड़कों पर खड़े होने को मजबूर हैं। ट्रैफिक पुलिस से एनओसी लेना जरूरी नियमानुसार ट्रैफिक पुलिस से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की शर्तों का भी खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। अनुमति प्राप्तकर्ता की यह जिम्मेदारी है कि वह अनुमोदित ले-आउट प्लान की शर्तों का पालन करते हुए विवाह स्थल विकसित करे, लेकिन मॉनिटरिंग के अभाव में शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लगन-सावे के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं जब सड़कों पर घंटों तक ट्रैफिक रेंगता नजर आता है। नगर निगम सिर्फ यूडी टैक्स का टारगेट पूरा करने के लिए सीज का भय दिखाता है और लक्ष्य पूरा होते ही कार्रवाई करना भूल जाते हैं। वहीं ट्रैफिक पुलिस भी सिर्फ वाहनों के चालान करती है, लेकिन अवैध रूप से सड़कों पर पार्किंग करने वाले मैरिज होम संचालकों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं। अस्पताल के नजदीक ही चल रहे मैरिज होम नियमों में अस्पताल की 100 मी. परिधि में मैरिज होम संचालन पर स्पष्ट प्रतिबंध होने के बावजूद कई केंद्र अस्पतालों के नजदीक धड़ल्ले से चल रहे हैं, जो मरीजों की शांति और एम्बुलेंस के आवागमन में बड़ी बाधा बनते हैं। नगर निगम के राजस्व अधिकारी तेजराम मीना ने बताया कि सभी मैरिज होम की जांच कराएंगे जहां भी वाहन खड़े मिले उनके खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। मुखर्जी नगर स्थित एक मैरिज होम के बाहर खड़े वाहन। गोवर्धन गेट स्थित एक मैरिज होम के बाहर खड़े वाहन। जिम्मेदारों की अनदेखी पड़ रही भारी लोगों का कहना है कि पार्किंग की समस्या को लेकर न तो नगर निगम कोई ठोस कार्रवाई कर रहा है और न ही यातायात विभाग इन मैरिज होम संचालकों पर लगाम कस पा रहा है। अनुमति प्राप्तकर्ता को आवेदन स्थल पर स्वयं के खर्चे पर सुरक्षित पार्किंग स्थल उपलब्ध कराना होता है, लेकिन खर्च बचाने के चक्कर में संचालक सड़कों को ही अपनी पार्किंग समझ बैठे हैं।