जयपुर के सिनेमा हॉल में परिजनों के साथ अपनी मूवी 'बेबी डू डाई डू' देखकर एक्टर मरुधर शेखावत रोने लगे। जयपुर आए मरुधर ने बॉलीवुड में अपना संघर्ष, मुंबई की 12 साल लंबी यात्रा, क्रिकेट से एक्टिंग तक के सफर, फिल्म मिलने की कहानी, माता-पिता के त्याग और पहली सफलता के भावुक पलों को खुलकर साझा किया। मां और परिवार के साथ जीटी सेंट्रल में मंगलवार को फिल्म देखने के बाद दर्शकों के बीच आकर मरुधर भावुक हो गए। उन्होंने कहा- मुंबई में बड़े पर्दे पर दिखने के लिए 12 साल पहले जयपुर से गया था। अब यह सपना पूरा हुआ है। मैंने शुरुआत से एक बात तय कर ली थी कि मुझे सिर्फ मेहनत करनी है। मैं कभी रिजल्ट के पीछे नहीं भागा। मुझे हमेशा अपनी जर्नी पर भरोसा था। मैं मंजिल से ज्यादा सफर को जीना चाहता हूं। उन्होंने कहा- मैं राजस्थान का बेटा हूं। राजस्थान ने इरफान खान जैसे महान कलाकार दिए हैं। मैं भी उसी तरह का ईमानदार अभिनेता बनना चाहता हूं। अच्छे किरदार निभाना चाहता हूं। मरुधर ने बॉलीवुड में इस मूवी से अपना डेब्यू किया है। मरुधर मुंबई में 100 से ज्यादा विज्ञापन कर चुके हैं। पहले देखें सिनेमाहॉल् में दर्शकों के साथ एक्टर मरुधर की PHOTOS सवाल: डेब्यू के बारे में बताइए। जयपुर से हैं और पहली फिल्म को इतनी बड़ी रिलीज मिली। अनुभव कैसा रहा? मरुधर शेखावत: मैं यही कहना चाहूंगा कि यह मेरी जिंदगी का बहुत बड़ा पल है। पिछले 12 साल से मैं मुंबई में रह रहा हूं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत करता रहा हूं। आज जब यह मौका मिला है तो मैं इसे पूरी तरह जीना चाहता हूं और इसका पूरा फायदा उठाना चाहता हूं। सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। लोग हमारी फिल्म की तारीफ कर रहे हैं। अब हमारी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि ज्यादा से ज्यादा लोग थिएटर में आएं, फिल्म देखें। कलाकार के लिए दर्शकों का प्यार और उनकी प्रतिक्रिया सबसे बड़ी कमाई होती है। सवाल: 12 साल का संघर्ष... विज्ञापनों से लेकर पहली फिल्म तक का सफर कैसा रहा? मरुधर शेखावत: मुंबई जाने वाले हर इंसान की कहानी अलग होती है। किसी की जिंदगी दो साल में बदल जाती है। किसी की पांच साल में और किसी की 12 साल में। मेरे लिए यह सफर 12 साल लंबा रहा। मैं चाहता हूं कि मैं लगातार इतना काम करता रहूं कि मेरे पास रुककर सोचने का भी समय न हो। आज जब मैं अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए जयपुर आया। यहां कई जगह हमारे शो हाउसफुल मिले तो मेरे लिए वह बेहद भावुक पल था। मैं खुद थिएटर के बाहर जाकर उन लोगों से मिलना चाहता था, जिन्होंने टिकट खरीदकर हमारी फिल्म देखने का फैसला किया। उस वक्त मेरे दिल और दिमाग में क्या चल रहा था, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मैं बेहद खुश हूं और एक्साइटेड भी। सवाल: फिल्म तक पहुंचने की कहानी क्या रही? साकिब सलीम-हुमा कुरैशी के साथ काम का अनुभव कैसा रहा? मरुधर शेखावत: यह दिलचस्प कहानी है। मैं और साकिब सलीम बचपन के दोस्त हैं। हमने स्कूल, कॉलेज और क्रिकेट साथ खेला है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मैंने करीब 10 साल तक राजस्थान के लिए क्रिकेट भी खेला है। जब साकिब मुंबई गए और उन्हें यशराज फिल्म्स की पहली फिल्म मिली, तब उन्होंने मुझे बहुत प्रेरित किया। हुमा ने भी मुझे काफी मोटिवेट किया। उसी समय मुझे महसूस हुआ कि मेरे अंदर भी एक कलाकार है और मुझे भी अभिनय को गंभीरता से आजमाना चाहिए। फिर मैं मुंबई चला गया और दिन-रात मेहनत करता रहा। जो भी काम मिला, मैंने कभी मना नहीं किया। छोटा-बड़ा कुछ नहीं देखा। आज उसी मेहनत का नतीजा है कि मेरी पहली फिल्म रिलीज हो चुकी है। सवाल: इस फिल्म का चयन कैसे हुआ? ऑडिशन और शूटिंग का अनुभव कैसा रहा? मरुधर शेखावत: मैं एक्टिंग वर्कशॉप कर रहा था। उस वर्कशॉप को अभिनेता रचित, जो फिल्म में हुमा के अपोजिट हैं। वर्कशॉप के दौरान उन्होंने बिना बताए मेरा ऑडिशन रिकॉर्ड किया और निर्देशक नचिकेता सामंत को भेज दिया। उन्हें ऑडिशन इतना पसंद आया कि उन्होंने तुरंत कहा कि तुम फिल्म में हो। इसके बाद असली तैयारी शुरू हुई। अगले 8 महीनों तक मैंने अपने किरदार 'मनु' के लिए खुद को पूरी तरह बदला। मैंने काफी वजन कम किया। अपना पूरा लुक बदला और किरदार के अनुसार खुद को तैयार किया। आज जब फिल्म रिलीज हो चुकी है तो लगता है कि वह सारी मेहनत सफल हो गई। सवाल: जब माता-पिता ने पहली बार आपको बड़े पर्दे पर देखा, उस समय क्या महसूस हुआ? मरुधर शेखावत: यह मेरी जिंदगी के सबसे भावुक पलों में से एक था। मेरे माता-पिता ने मेरे लिए बहुत त्याग किया है। पिछले 12 साल मैं उनसे दूर रहा हूं। जब ऐसे समय में आपकी मेहनत रंग लाती है और आपके माता-पिता आपको बड़े पर्दे पर देखकर खुश होते हैं, तब अंदर से बहुत भावुक हो जाते हैं। आज मेरी पूरी फैमिली बेहद खुश है। सिर्फ मम्मी-पापा ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार मुझे लगातार फोन कर रहा है। मैसेज भेज रहे हैं। सोशल मीडिया की रील्स शेयर कर रहे हैं। सब लोग मेरी सफलता को अपनी सफलता की तरह मना रहे हैं। इससे बड़ी खुशी मेरे लिए कोई नहीं हो सकती। सवाल: आपकी फिल्म बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म के सामने रिलीज हुई। इसके बावजूद शानदार प्रतिक्रिया मिली। इसे कैसे देखते हैं? मरुधर शेखावत: फिल्म बनाना बहुत मुश्किल काम है। चाहे कोई भी फिल्म हो, उसके पीछे 400-500 लोगों की मेहनत होती है। जब कोई फिल्म नहीं चलती तो लोग सिर्फ उसका रिजल्ट देखते हैं, लेकिन उसके पीछे हजारों घंटे की मेहनत होती है। मैं मानता हूं कि हर फिल्म को दर्शक मिलना चाहिए। हर कलाकार की मेहनत सफल होनी चाहिए। जहां तक हमारी फिल्म की बात है। हमें खुशी है कि लोगों को यह पसंद आ रही है। हमारा किसी से कोई मुकाबला नहीं है। हम अपनी अलग राह पर चल रहे हैं। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि जिन्होंने फिल्म देखी है। वे दूसरों को भी इसे देखने के लिए प्रेरित करें। सवाल: बेटे को पहली बार बड़े पर्दे पर देखकर कैसा लगा? मरुधर की मां: बहुत अच्छा लगा... बहुत खुशी हुई। मैं बता नहीं सकती कि उस पल मुझे कैसा महसूस हुआ। यह हमारे परिवार के लिए गर्व का क्षण है। मैं हमेशा उसका हौसला बढ़ाती थी। उसे यही कहती थी कि बेटा, जिंदगी में तकलीफ भी आती है और सुख भी मिलता है। मेहनत करते रहो, सब ठीक होगा। मैं उसे हमेशा यही समझाती थी कि कभी हिम्मत मत हारना। अच्छे दिन जरूर आएंगे। आज मैं बहुत खुश हूं। मेरी खुशी की कोई सीमा नहीं है। मां के लिए इससे बड़ा दिन और क्या हो सकता है। मरुधर शेखावत: ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब मैं मम्मी से बात नहीं करता। हम रोज कई बार वीडियो कॉल पर बात करते हैं। दूर किसी दूसरे शहर में रहना और परिवार से दूर होना आसान नहीं होता। मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं होने दिया कि मैं उनसे अलग हूं। उन्होंने मेरे लिए जो त्याग किया है, उसे मैं कभी भूल नहीं सकता। अब बस यही उम्मीद है कि आने वाला समय और भी अच्छा होगा और मैं अपने माता-पिता का नाम लगातार रोशन करता रहूं। सवाल: आगे कौन-कौन से प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं? मरुधर शेखावत: अभी एक नई फिल्म पर काम चल रहा है। फिलहाल उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता, लेकिन उम्मीद है कि बहुत जल्द उसकी आधिकारिक घोषणा होगी। मैं चाहता हूं कि अब लगातार अच्छा काम करता रहूं और दर्शकों का प्यार इसी तरह मिलता रहे।