केंद्र सरकार ने मथुरा-नागदा तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना घोषित करते राष्ट्रीय अवसंरचना का दर्जा दे दिया है। भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के बाद अब आगामी प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ है। बजट स्वीकृति, भरतपुर सहित कई जिलों में भूमि अधिग्रहण व निर्माण प्रक्रिया का कार्य शुरू करने को कानूनी मजबूती मिल गई है। इससे लंबे समय से लंबित इस प्रोजेक्ट के तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है और भरतपुर की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। समानांतर ट्रेनों की आवाजाही से सिग्नल पर इंतजार खत्म होगा, जिससे व्यापार और पर्यटन को सीधा फायदा मिलेगा। मथुरा-नागदा तीसरी एवं चौथी रेल लाइन परियोजना करीब 568 किलोमीटर लंबी है, जो नागदा (मध्य प्रदेश ) से मथुरा (उत्तरप्रदेश) तक कोटा और भरतपुर होते हुए गुजरती है। वर्तमान में इस रूट पर भारी ट्रैफिक के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी आम समस्या है। भास्कर ब्रेकिंग - भरतपुर के लिए गेम- चेंजर होगी परियोजना जिले के कृषि उत्पाद, पत्थर उद्योग और डेयरी सेक्टर को तेज व सस्ता परिवहन मिलेगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में इजाफा होगा। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान आने वाले पर्यटकों के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी। निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, जबकि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद रेलवे संचालन, रखरखाव और लॉजिस्टिक्स से जुड़े नए अवसर भी पैदा होंगे। गजट अधिसूचना के बाद प्रक्रियाएं सरल होने से देरी की संभावना भी कम मानी जा रही है। “मथुरा-नागदा तीसरी एवं चौथी रेल लाइन परियोजना को भारत सरकार द्वारा विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया है। इससे इस महत्वपूर्ण रूट पर क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी। ये कार्य स्वीकृत होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। परियोजना से कनेक्टिविटी, माल परिवहन और यात्री सुविधाओं में व्यापक सुधार होगा।” - सौरभ जैन, सीनियर डीसीएम, पश्चिम मध्य रेलवे, कोटा