कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं (प्रसूताओं) की तबीयत बिगड़ गई। कुछ ही देर बाद एक महिला ने दम तोड़ दिया। एक अन्य महिला की स्थिति गंभीर बनी हुई है। परिवार वालों का आरोप है कि सर्जरी के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसकी वजह से ऐसे हालात बने हैं। यह पूरा मामला न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का है। सर्जरी के बाद महिलाओं का यूरिन बंद हो गया। किडनी में इन्फेक्शन के साथ ही अचानक BP लो हो गया था। चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा के झालखेड़ा की रहने वाली पायल की 5 मई की सुबह मौत हो गई थी। सभी महिलाओं को 5 मई की रात 10 बजे के बाद सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (SSB) में शिफ्ट किया गया था। मरीजों का हाल जानने विधायक पहुंचे बुधवार को कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा मरीजों का हाल जानने मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने कमेटी बनाई है। कहीं न कहीं चूक तो हुई है। वार्ड से लौटते समय विधायक हॉस्पिटल की लिफ्ट में फंस गए। काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला जा सका। इन महिलाओं को SSB में शिफ्ट किया गया… 1. रागिनी (29) पत्नी लोकेश मीणा, निवासी झाड़ोल, इटावा, कोटा 2. सुशीला (35) पत्नी ओमप्रकाश, बरडा बस्ती, कोटा 3. चंद्र कला पत्नी राकेश, काकरिया, करवार, कोटा 4. धन्नी पत्नी मोहन लाल, संजय नगर, कोटा 5. ज्योति (20) पत्नी रवि, क्रेसर बस्ती, अनंतपुरा, कोटा 4 मई को हुआ था ऑपरेशन हॉस्पिटल में गायनिक (Gynecologist) की दो यूनिट हैं। पांचों प्रसूता अलग-अलग यूनिट में भर्ती हुई थीं। सभी प्रसूताओं की ऑपरेशन के 7-8 घंटे बाद तबीयत बिगड़ने लगी थी। पहले ब्लड प्रेशर कम होने लगा था। रागिनी की सर्जरी 4 मई की सुबह 11.45 बजे हुई थी। सुशीला को 3 मई को हॉस्पिटल लाया गया था। 4 मई की शाम 6 बजे उसका ऑपरेशन किया गया था। धन्नी को 4 मई को हॉस्पिटल लाया गया था, उसी दिन शाम 5 बजे ऑपरेशन हुआ। ज्योति को 4 मई को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उसी दिन दोपहर करीब 1 बजे सीजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के कुछ देर बाद ही बिगड़ी हालत रागिनी के भाई विकास ने बताया कि 4 मई को उनकी बहन को भर्ती करवाया गया था। सीजेरियन डिलीवरी होने के बाद उसे वार्ड में लाया गया। इसके कुछ देर बाद ही उसकी तबीयत खराब होने लगी। पहले तो काफी यूरिन आया। बाद में उसका बीपी लो होने लगा। उसके बाद यूरिन बंद हो गया। हमने डॉक्टर्स को बताया लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। एक सिंगल पेशेंट के साथ होता तो अलग बात थी। एक साथ 6 महिलाओं के साथ एक जैसी परेशानी हुई है। यह डॉक्टरों की लापरवाही से हुआ है। धन्नी के भाई कुशाल सुमन ने बताया- सर्जरी के बाद पेशेंट को ब्लीडिंग होने लगी थी। अब भी संतोषजनक सुधार नहीं हुआ है। हमने डॉक्टर्स को बताया लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। एक सिंगल पेशेंट के साथ होता तो अलग बात थी, लेकिन एक साथ 6 महिलाओं के साथ एक जैसी परेशानी हुई है। यह डॉक्टरों की लापरवाही से हुआ है। मेडिकल बोर्ड का गठन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल नीलेश जैन ने बताया कि महिलाओं को SSB में शिफ्ट किया है। इलाज के लिए बोर्ड का गठन किया है। इसमें सर्जन, एनेस्थीसिया गायनिक, फिजिशियन नेफ्रोलॉजी के विशेषज्ञ शामिल हैं। उधर,कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम भी हॉस्पिटल पहुंचीं। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते ये घटना हुई है।