कोटा में किडनी ट्रांसप्लांट की मांग को लेकर डायलिसिस कराने से इनकार करने वाली महिलाएं अस्पताल प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद उपचार के लिए तैयार हो गईं। अधिकारियों ने उनकी मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद महिलाएं डायलिसिस के लिए तैयार हो गई। बताया गया कि अब करीब 20 दिनों तक महिलाओं की चिकित्सकीय निगरानी की जाएगी, जिसके बाद उनकी स्थिति और आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा। दरअसल, मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती 5 प्रसूताओं के इलाज और उनके परिजनों की मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से बना गतिरोध बना हुआ था, जो गुरुवार को आखिरकार खत्म हो गया। प्रशासन और पीड़ित परिवारों के बीच हुई बैठक में सभी प्रमुख मांगों को नियमानुसार पूरा करने का बकायदा लिखित आश्वासन दिया गया है। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन ने पीड़ित महिलाओं और उनके परिवार से बातचीत की। जिसके बाद महिलाएं डायलिसिस के लिए राजी हो गई। डोनर मिलने पर किया जाएगा निःशुल्क किडनी ट्रांसप्लांट मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ.नीलेश जैन ने बताया कि आश्वासन के अनुसार महिलाओं को डायलिसिस में किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। प्राथमिकता के साथ उन्हें जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलेगी। कैडेवर डोनर के लिए मरीजों का प्राथमिकता से रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। डोनर मिलने पर नियमानुसार निःशुल्क किडनी ट्रांसप्लांट किया जाएगा। परिजनों की सहमति होने पर राजस्थान के किसी भी अन्य सरकारी संस्थान में निशुल्क ट्रांसप्लांट की व्यवस्था कराई जाएगी। ट्रांसप्लांट के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में होने वाली सभी आगामी जांचें और दवाएं पूरी तरह निशुल्क रहेंगी। 90 दिन पूरे होते ही बढ़ाई जाएगी आगे की कार्रवाई डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि किसी भी मरीज का ट्रांसप्लांट सीधे एक्यूट रिनल फेल्योर की स्थिति में नहीं किया जा सकता। क्रॉनिक किडनी फेल्योर घोषित करने के लिए चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत कम से कम तीन महीने का समय आवश्यक है। इन मरीजों को रजिस्ट्रेशन कराए 70 दिन हो चुके हैं। नियमानुसार जरूरी 90 दिन पूरे होते ही यानी 20 दिन बाद आगे की कार्रवाई बढ़ाई जाएगी। तब तक किडनी को सुरक्षित रखने के लिए डायलिसिस आवश्यक है। बैठक के दौरान डॉ. नीलेश जैन, एडीएम विनोद कुमार मल्होत्रा मौजूद रहे।