राजस्थान में पंचायतीराज और नगर निकायों के चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण को लेकर सर्वे किया जा रहा है। 10 जुलाई से शुरू हुए सर्वे की एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार- सर्वे का सबसे तेजी से काम बाड़मेर और सलूंबर जिले में हुआ। वहीं सबसे कम स्पीड से कोटा और बारां में काम हुआ है। कुल मिलाकर 23 जुलाई तक केवल 69.86 काम ही पूरा हुआ है। सर्वे की आखिरी तारीख 26 जुलाई है, ऐसे में 100 प्रतिशत काम इन तीनों में पूरा करना ही होगा। बता दें कि ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने सर्वे की अंतिम तारीख 3 दिन बढ़ाकर 26 जुलाई कर दी है। आयोग को 5 अगस्त तक राज्य सरकार को रिपोर्ट देनी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही राजस्थान में पंचायतीराज में जिला परिषद, पंचायत समितियों और नगर निकायों में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में ओबीसी सीटें निर्धारित होंगी और इसके बाद आरक्षण की लॉटरी होगी। सर्वे का अब तक केवल 69.86 प्रतिशत काम पूरा, 3 दिन बाकी रिपोर्ट के अनुसार- राजस्थान में अब तक 75,97,312 ओबीसी परिवारों में से 53,07,801 परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है। इनमें से 43,45,888 परिवार ग्रामीण और 9,61,913 परिवार ग्रामीण क्षेत्र के है। यानी 69.86 प्रतिशत सर्वे पूरा कर दिया गया है। अब बाकी दिनों में सर्वे का काम 100 प्रतिशत पूरा करना होगा। आयोग ने प्रति परिवार औसत पांच सदस्य मानकर ओबीसी आबादी 3.80 करोड़ से 4 करोड़ के बीच होने का अनुमान लगाया है। आयोग के सचिव अशोक जैन ने कहा कि रिपोर्ट समय पर देने के लिए दिन-रात काम चल रहा है और शेष सर्वे जल्द पूरा होने की उम्मीद है। राजसाथी मोबाइल ऐप के जरिए सर्वे राजसाथी मोबाइल ऐप के जरिए ये सर्वे किया जा रहा है। इसके पीछे मकसद ये ही है कि सर्वे पारदर्शी और त्रुटिरहित होगी। जिलों में जिला प्रशासन के निर्देशन में बूथ लेवल अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी और शिक्षकों को प्रगणक बनाकर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। टीमें जनआधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों के आधार पर घर-घर जाकर जानकारी जुटा कर ये सर्वे कर रही हैं। फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए वरिष्ठ अधिकारी अपलोड किए गए डेटा की रैंडम जांच भी कर रहे हैं। सर्वे में ये जानकारी देना जरूरी सर्वें के टॉप 5 जिले सर्वें में सबसे नीचे के 5 जिले जिलेवार सर्वे की रिपोर्ट