जयपुर की श्रीजा गुप्ता ने 19 साल की उम्र में मिस राजस्थान-2026 का ताज अपने नाम किया। जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहीं श्रीजा ने बिना मॉडलिंग अनुभव के यह सफर तय किया। उन्होंने जीत का श्रेय मां दीपिका गुप्ता, पिता रत्नेश गुप्ता, टीचर्स और लगातार सीखने की अपनी आदत को दिया। वैशाली नगर स्थित रंगोली ग्रीन्स में रहने वाली श्रीजा ने अपनी संघर्ष भरी यात्रा, मिस राजस्थान बनने के अनुभव, समाज के लिए अपने नजरिए को लेकर दैनिक भास्कर से बातचीत की। श्रीजा ने कहा- मेरी तैयारी तीन बातों पर आधारित थी। पहली पंक्चुअलिटी यानी समय की पाबंदी। दूसरी हर दिन की प्लानिंग, आउटफिट्स और शेड्यूल तय रखना। तीसरी कंसिस्टेंसी। चाहे मैं सही कर रही थी या गलत, लेकिन सीखते हुए बढ़ती रही। मेरा मानना है कि निरंतरता ही आपको लक्ष्य (टारगेट) तक पहुंचाती है। मुझे लगता है कि हर कोशिश किसी न किसी मंजिल तक जरूर पहुंचाती है। पहले देखें श्रीजा गुप्ता की PHOTOS… अब पढ़िए… श्रीजा की जर्नी, लक्ष्य और परिवार का रिएक्शन सवाल: मिस राजस्थान बनने तक की पूरी जर्नी के बारे में बताएं? श्रीजा गुप्ता: खम्मा घणी राजस्थान। मैं 19 साल की हूं। यह जर्नी मेरे लिए देखने में बहुत सिंपल रही, लेकिन इसने मुझे जिंदगी ने बहुत बड़े सबक सिखाए। इस साल मैंने एक ही टारगेट लिया था कि मैं जो भी करूंगी, उसमें अपना 100 प्रतिशत दूंगी। मेरे माता-पिता हमेशा से प्रोत्साहित करने वाले रहे। इसी वजह से मैंने मिस राजस्थान के लिए रजिस्ट्रेशन किया। इसके बाद मेरा पर्सनल इंटरव्यू राउंड हुआ। फिर मेरा चयन टॉप-28 में हो गया। वहीं से मेरी असली जर्नी शुरू हुई। लगभग एक महीने तक तैयारी चली। मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत सीखने की इच्छा थी। मैं हर छोटी-बड़ी चीज सीखना चाहती थी। योगेश सर, निमिषा मैम, मिस राजस्थान ऑर्गेनाइजेशन और लास्ट ईयर की सभी क्वीन ने मुझे गाइड किया। मैं हर चीज को लेकर सवाल पूछती थी। हर छोटी डिटेल पर ध्यान देती थी और यही आदत मेरे बहुत काम आई। सवाल: 10वीं क्लास के बाद आगे के लिए कन्फ्यूज थीं। मॉडलिंग में सफलता कैसे मिली? श्रीजा गुप्ता: मेरी स्कूलिंग मानसरोवर के इंडिया इंटरनेशनल स्कूल से हुई है। 10वीं के बाद मेरे सामने भी वही स्थिति थी, जो आज कई स्टूडेंट्स के सामने होती है। मेरे पापा का बैकग्राउंड IIT से जुड़ा रहा है। इसलिए मैंने भी PCM चुना। मैंने JEE की तैयारी की। सच कहूं JEE मेरे लिए नहीं था। मैं IIT तक नहीं पहुंच सकी। फिलहाल मैं बीटेक कर रही हूं, लेकिन मेरे मन में हमेशा यह बात थी कि मेरे पास अभी काफी समय है। मैं चाहती थी कि ऐसा क्षेत्र देखें, जिसमें मैं वास्तव में अच्छा कर सकूं। मैंने मिस राजस्थान से पहले भी कई चीजों में खुद को आजमाया, लेकिन कहीं न कहीं मुझे लगता है कि मिस राजस्थान शायद मेरी डेस्टिनी थी। सवाल: जीत के बाद जब घर पहुंचीं तो परिवार का क्या रिएक्शन था? श्रीजा गुप्ता: मेरे माता-पिता बहुत ज्यादा खुश थे। उन्होंने मेरे लिए बहुत शानदार स्वागत की तैयारी की थी। मैं वैशाली नगर स्थित रंगोली ग्रीन्स में रहती हूं। वहां मेरे स्वागत के लिए रैली निकाली गई। जीप में बैठाकर क्षेत्र में घुमाया गया। ढोल-नगाड़ों के साथ सभी लोगों ने मेरा स्वागत किया। हम सबसे पहले मंदिर गए। जहां मैंने अपना क्राउन माता जी के चरणों में रखा और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद घर पहुंचे, जहां पूरा सेलिब्रेशन रूम तैयार किया गया था। केक काटा। केक पर भी मेरी तस्वीरें थीं और मेरी पूरी जर्नी की तस्वीरों से पूरा हॉल सजाया गया था। परिवार, दोस्तों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, डांस किया और जीत का जश्न मनाया। वह पल मेरी जिंदगी के सबसे यादगार पलों में से एक रहेगा। सवाल: क्या इससे पहले कभी मॉडलिंग की थी? श्रीजा गुप्ता: सच कहूं तो मैंने कभी प्रोफेशनल मॉडलिंग नहीं की थी। बचपन में एक-दो छोटे फैशन इवेंट किए थे। इसके बाद मेरा इस फील्ड से कोई संबंध नहीं रहा। जब मैं मिस राजस्थान में आई, तब मुझे मेकअप के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं थी। कौन-सा प्रोडक्ट कैसे इस्तेमाल होता है। कॉम्पैक्ट क्या होता है। स्किन प्रेप कैसे करते हैं। इनमें से कुछ भी नहीं पता था। मैं यहां पूरी तरह नई थी।
वहीं मुझे जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी से काफी सपोर्ट मिला। मैं पढ़ाई के साथ-साथ इंटर्नशिप भी कर रही हूं। इसके अलावा मैं AISTE (Association for International Students Exchange) से भी जुड़ी हूं। जहां मुझे नई चीजें सीखने और अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेने का मौका मिलता है। इन सभी अनुभवों ने मेरी पर्सनैलिटी को काफी बेहतर बनाया। सवाल: मिस राजस्थान बनने के बाद समाज के लिए क्या काम करना चाहती हैं? श्रीजा गुप्ता: हमारे पेजेंट में ब्यूटी विद ए कॉज भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। मेरा विषय Stop Sympathizing and Start Strengthening रहा। पिछले साल एक महीने मैंने एक NGO में काम किया। वहां मैंने ऐसे बहुत सारे बच्चों को देखा, जो बेहद प्रतिभाशाली थे। कोई बहुत अच्छा गाता था। कोई डांस करता था। कोई पढ़ाई में बहुत अच्छा था। मुझे लगा कि हम अक्सर ऐसे बच्चों के लिए सिर्फ सहानुभूति जताते हैं। हम कहते हैं कि उन्हें खाना मिलना चाहिए। शिक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन दो-चार दिन बाद हम उन्हें भूल जाते हैं। मेरा मानना है कि हमें सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत बनाना चाहिए। हमें उनके और अवसरों के बीच की दूरी कम करनी होगी। उन्हें ऐसे प्लेटफॉर्म देने होंगे, जहां वे प्रतिभा दिखा सकें और आगे बढ़ सकें।