उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) में PG (स्नातकोत्तर) कोर्स के एडमिशन इस बार चार महीने से ज्यादा पिछड़ गए हैं। नियम के मुताबिक- जुलाई में एडमिशन पूरे होकर अगस्त से क्लास शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन अक्टूबर में अब तक MA समेत अन्य पीजी कोर्स की 2 हजार से ज्यादा सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया ही चल रही है। अब 2 से 11 नवंबर तक दिवाली की छुट्टियां रहेंगी, जिससे 15 नवंबर के बाद ही नियमित पढ़ाई शुरू हो पाएगी। आधा सत्र बिना पढ़ाई के ही निकलने से छात्रों की 2 साल की पीजी डिग्री 3 साल में पूरी होने का खतरा खड़ा हो गया है। वहीं, यूनिवर्सिटी के कुलगुरू प्रो. कैलाश चंद्र डागा का कहना है कि यूजी थर्ड-ईयर के रिजल्ट देरी से आने की वजह से पीजी एडमिशन में देरी हुई। सभी विश्वविद्यालयों में यही स्थिति है। जल्द सुखाड़िया में यह प्रोसेस पूरा करेंगे। कोरोना काल से भी बुरे हालात, पहली बार नवंबर में होंगी क्लासेज यूनिवर्सिटी के इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है, जब अक्टूबर खत्म होने तक एडमिशन प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है। कोरोना महामारी के समय भी यूनिवर्सिटी ने सितंबर के अंत तक एडमिशन पूरे कर लिए थे। इस बार हालात इतने खराब हैं कि नवंबर के मध्य से पहले नियमित कक्षाएं शुरू होना मुश्किल है। नए कुलगुरू के आने के 5 महीने बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था पिछले कुछ समय से सुखाड़िया यूनिवर्सिटी विवादित कुलपतियों के कार्यकाल को लेकर चर्चा में रही है। इसी साल 14 मई को प्रो. कैलाश चंद्र डागा ने कुलगुरू का पद संभाला था। उनकी नियुक्ति के पांच महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी यूनिवर्सिटी की प्रवेश और परीक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई है। यूजीसी के नियम कैसे होंगे पूरे, छुट्टियों में निकल जाएगा समय अगर नवंबर के दूसरे सप्ताह के बाद एमए (मास्टर ऑफ आर्ट्स) की कक्षाएं शुरू भी होती हैं, तो आगे छुट्टियों का अंबार है। 2 से 11 नवंबर तक दिवाली अवकाश रहेगा और दिसंबर के अंत में शीतकालीन अवकाश (विंटर वेकेशन) आ जाएगा। यूजीसी के नियमों के मुताबिक- परीक्षा से पहले तय दिनों तक क्लास लगना जरूरी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 4 हजार से ज्यादा सीटों पर प्रवेश लेने वाले छात्रों का कोर्स कब पूरा होगा और उनकी परीक्षाएं कब करवाई जाएंगी। छात्रवृत्ति, हॉस्टल और प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी सीधा असर एडमिशन में चार महीने की देरी से आदिवासी अंचल और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के सामने हॉस्टल आवंटन और छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) के फॉर्म भरने का संकट भी खड़ा हो गया है। इसके अलावा जो छात्र पीजी के साथ नेट-जेआरएफ या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, सत्र पिछड़ने से उनका पूरा शेड्यूल गड़बड़ा गया है। दो साल की डिग्री तीन साल में होने के डर से घट रहे छात्र शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूनिवर्सिटी की इसी लेटलतीफी की वजह से पीजी में एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या लगातार गिर रही है। कोई भी छात्र दो साल की डिग्री में तीन साल खराब नहीं करना चाहता। अब यूनिवर्सिटी के सामने दो ही रास्ते बचेंगे- या तो डिग्री एक साल देरी से पूरी होगी, या फिर नियमों को ताक पर रखकर बिना पूरी पढ़ाई के आनन-फानन में परीक्षाएं करवाकर औपचारिकता पूरी की जाएगी। सितंबर-अक्टूबर में आए यूजी के रिजल्ट, छात्रों पर पड़ी मार एडमिशन में देरी की सबसे बड़ी वजह यूजी (स्नातक) फाइनल ईयर की परीक्षाओं और उनके परिणामों में हुई देरी है। जो रिजल्ट जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह तक आ जाने चाहिए थे, वे इस बार सितंबर के आखिरी सप्ताह और अक्टूबर के पहले सप्ताह में जारी हुए। कुछ ही विषयों के परिणाम अगस्त में आए थे। इस देरी की जिम्मेदारी कोई भी ले, लेकिन इसका सीधा नुकसान छात्रों को अपने समय और करियर के रूप में उठाना पड़ रहा है।