लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मानसून मेहरबान हो गया है। करीब 10 दिन देरी से आए मानसून के बावजूद सोमवार को जिले के कई गांवों में तेज और मूसलाधार बारिश हुई। दिनभर उमस और गर्मी से लोग बेहाल रहे। शाम 4 बजे के बाद अचानक मौसम बदला।आसमान में छाए घने, काले बादलों के साथ मेघगर्जना का दौर शुरू हो गया। आसमान में रेत का बवंडर उठा। महज चंद मिनटों में पूरे शहर समेत गांवों को आगोश में ले लिया। रेतीले बवंडर से एक बारगी अंधेरा छा गया। हर तरफ रेत की चादर बिछ गई। शहर में लगे होर्डिंग, बोर्ड और बैनर अंधड़ में उड़ गए। सड़कों पर एक बारगी कर्फ्यू जैसे हालात बन गए। छोटे-बड़े सभी तरह के वाहन थम गए। सोमवार को सबसे ज्यादा 56 एमएम बारिश कल्याणपुर में रिकॉर्ड की गई। सिणधरी में 46, सिवाना में 40, बालोतरा में 25, नोखड़ा में 38, समदड़ी में 12, सेड़वा में 10, धनाऊ में 9, गुड़ामालानी व धोरीमन्ना में 8-8, बाड़मेर व बाड़मेर ग्रामीण में 6-6, पाटौदी व पचपदरा में 3-3, चौहटन में 2 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। यह मानसून की पहली बारिश है। 5 साल बाद सबसे गर्म जुलाई, 42.5 डिग्री इस बार मानसून के देरी से आने की वजह से गर्मी भी ज्यादा रही है। मानसून की एंट्री हुई है। सोमवार को बाड़मेर का अधिकतम पारा 42.5 डिग्री रहा। न्यूनतम 30.4 डिग्री रहा। 5 साल में जुलाई सबसे गर्म रहा है। जुलाई 2025 में अधिकतम 38, 2024 में 41.2, 2023 में 39.6, 2022 में 38.2, और 2021 में 42.8 डिग्री रहा था। जिले में 11 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुवाई का लक्ष्य नोखड़ा, चौहटन, सेड़वा, धनाऊ इलाके में बारिश हुई है। जिले का 70 फीसदी इलाका सूखा है। शिव, बायतु, गिराब, हरसाणी, रामसर, गडरारोड, बाड़मेर व बाड़मेर ग्रामीण तहसील इलाकों को बारिश का इंतजार है। अब तक इन इलाकों में बुवाई शुरू नहीं हुई है। जिन इलाकों में बारिश हुई है, वहां किसानों ने खेतों में हल चलाना शुरू कर दिया है। इस बार खरीफ बुवाई का लक्ष्य 11 लाख हेक्टेयर है। इसमें 5.50 लाख हेक्टेयर में बाजरा, 2.50 लाख में ग्वार, 1 लाख में मोठ, 60 हजार में मूंग की बुवाई होगी।