17 साल की युवती न ढंग से चल पाती, न बैठ पाती। लेटे-लेटे पढ़ती है। वहीं, 24 साल के युवक को सहारा लेकर चलना पड़ता है। मुंबई निवासी एक युवक के कमर से लेकर घुटने तक के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। तीनों का दर्द एक है और दर्द की वजह भी एक- स्टेरॉयड। कोविड के दौरान इन्हें स्टेरॉयड दिए गए थे। जिसके साइड इफेक्ट अब सामने आ रहे हैं। स्टेरॉयड से ​न केवल की हड्डियां गल रहीं हैं, बल्कि नसें सिकुड़ने से खून की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में ऐसे दो ऑपरेशन हुए थे। जब डॉक्टर्स ने इनकी हिस्ट्री खंगाली तो सामने आया कि कोविड के दौरान ये लोग हॉस्पिटल में एडमिट थे। कोरोना से बचाने और इंफेक्शन को खत्म करने के लिए इन्हें स्टेरॉयड भी ​दिए गए थे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… केस 1 : 17 साल की छात्र को सोते-सोते पढ़ना पड़ता था महात्मा गांधी हॉस्पिटल के बोन एंड जॉइंट डिपार्टमेंट में सहायक आचार्य डॉ. निरोत्तम सिंह मील ने बताया कि दो साल पहले महात्मा गांधी हॉस्पिटल में ही 17 साल की लड़की आई थी। बच्ची न तो ढंग से चल पा रही थी और न ही बैठ पा रही थी। हाल ये था कि उसे लेटे-लेटे पढ़ना पड़ रहा था। कोविड के दौरान उसका इलाज चला था। बच्ची की हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई और इसके बाद वह सही हो पाई। केस 2 : सहारा लेकर चल रहा 24 साल का युवक फलोदी के रहने वाले 24 साल के युवक की स्टेरॉयड की वजह से हड्डियां गल गई थीं। पिछले एक साल से ज्यादा समय से वह बीमारी से परेशान था। उसकी जांच की तो सामने आया कि कूल्हे की हड्डियां गल चुकी थीं। युवक को सहारा लेकर चलना पड़ रहा था। इस युवक की भी हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई। केस 3 : मुंबई से आया युवक, चल-फिर नहीं पा रहा था एक युवक मुंबई से आया था। कोविड के दौरान काफी तबीयत खराब हुई और हॉस्पिटल में भी एडमिट हुआ। वह भी चलने-फिरने की स्थिति में नहीं था। उसके कूल्हे की दोनों हड्डियां काम करना बंद हो गई थी। स्टेरॉयड के इफेक्ट से दर्द भी असहनीय था। आखिर में उसकी भी सर्जरी करनी पड़ी। दावा : स्टेरॉयड ब्लड फ्लो को कम कर देता है एक्सपर्ट का दावा है कि जब भी किसी बीमारी में स्टेरॉयड दिया जाता है तो वह उस पर तुरंत रिएक्ट करता है और एक बार के लिए मरीज को ठीक कर देता है। इसके बाद स्टेरॉयड ब्लड फ्लो को कम कर देता है। हाल ही में जो केस सामने आए, उनमें भी ये ही पाया गया है कि कोविड में जिन लोगों को स्टेरॉयड लगे थे, उनमें ब्लड फ्लो कम हो गया और नसें सिकुड़ गई थीं। नसें सिकुड़ने की वजह से इसका इफेक्ट हड्डियों पर दिखने लगा। डॉक्टर्स बोले- कोविड के बाद सबसे ज्यादा केस बढ़े, इनमें युवा सबसे ज्यादा सिंह ने बताया- कोविड के बाद सबसे ज्यादा इस तरह के केस सामने आ चुके है। पिछले दो सालों की बात की जाए तो सबसे ज्यादा समस्या स्टेरॉयड की वजह से ​कूल्हे की हड्डियों में आई है। हालांकि उनका कहना है कि स्मोकिंग, एलर्जी की मेडिसिन और अल्कोहल लेने वालों में भी ये समस्या रहती है। उन्होंने बताया कि हैरानी की बात ये है कि इस तरह के केस सबसे ज्यादा 17 से 40 साल तक के उम्र के लोगों में है। इसकी वजह से वे अर्थराइटिस का भी शिकार हो रहे है। हर महीने ओपीडी में करीब 10 से ज्यादा ऐसे केस आ रहे हैं।