नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में इन्दिरा गांधी नहर परियोजना से जलापूर्ति 27 मार्च से 10 मई तक 45 दिनों के लिए बंद रहेगी। जल संसाधन विभाग ने आंशिक बंदी के साथ इसकी शुरुआत कर दी है। पीएचईडी विभाग के अनुसार राहत की बात ये है कि 15 अप्रैल तक नहर में उपलब्ध पानी से जलापूर्ति नियमित बनी रहेगी। इसके बाद दोनों जिलों की पेयजल व्यवस्था तय योजना अनुसार की जाएगी। नहरी परियोजना के एसई पी.एस. तंवर ने बताया कि नहर बंदी के व्यापक प्रभाव को देखते हुए दोनों जिलों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वे पूरा कर लिया गया है। दूर–दराज के गांव ढाणियों तक टैंकरों की मदद से पेयजल सप्लाई की जाएगी। ​नोखा दैया डैम में 10 हजार मिलियन लीटर पानी ​दोनों जिलों के 13 शहर और 1616 गांव की करीब 40 फीसदी आबादी इंदिरा गांधी नहर परियोजना के पानी पर ही आश्रित है। हालांकि 45 दिनों की नहरबंदी के दौरान बीकानेर स्थित नोखा दैया डैम में पानी का बैकअप रखा जाता है। इसकी कुल क्षमता 10,110 एमएलडी है। वर्तमान में इसमें 10 हजार मिलियन लीटर से अधिक पानी मौजूद है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए विभाग नलकूपों और डैम के पानी का भी उपयोग करेगा। साथ ही स्थानीय जल स्रोतों को भी सक्रिय किया जा रहा है। डीडवाना–कुचामन में 37 फीसदी के पास कनेक्शन नहीं विभागीय आंकड़ों की मानें तो नागौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में कुल 3 लाख 75 हजार परिवार रहते हैं। इनमें से 75 प्रतिशत परिवारों को नल कनेक्शन के जरिए पानी मिलता है। यहां 2 लाख 80 हजार के करीब घरेलू नल कनेक्शन हैं। डीडवाना–कुचामन जिले के ग्रामीण क्षेत्र में केवल 67 फीसदी परिवारों को ही नल से पानी सप्लाई किया जाता है। 33 फीसदी परिवार अब भी इस सुविधा से वंचित हैं। यहां 2 लाख 90 हजार परिवारों में से केवल 1 लाख 95 हजार परिवारों के पास नल कनेक्शन है। दोनों जिलों के करीब 1.5 लाख शहरी परिवारों के पास ही सौ फीसदी नल कनेक्शन हैं। हालांकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी पारंपरिक जल स्रोतों का उपयोग किया जा रहा है।