जिले में प्रस्तावित हाई ट्रांसमिशन लाइन परियोजना को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। सोमवार को जिलेभर के किसान मार्केट रेट कमेटी (एमआरसी) के बैनर तले पशु प्रदर्शनी मैदान में एकत्र हुए। यहां से प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जिला कलेक्टर को मांगों का ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की कि नागौर जिले में हाई ट्रांसमिशन लाइन से प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल जिला स्तरीय मार्केट रेट कमेटी (MRC) का गठन किया जाए तथा केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार किसानों को बाजार दर के आधार पर उचित मुआवजा दिया जाए। बाजार रेट का 400% मुआवजा मांगा ज्ञापन में किसानों ने कहा कि टावर और ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए बाजार दर का 400 प्रतिशत मुआवजा दिया जाए। साथ ही मुआवजे का भुगतान अग्रिम और एकमुश्त किए बिना जिले में कहीं भी कंपनी का कार्य शुरू नहीं कराया जाए तथा प्रशासन किसानों पर सहमति के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाए। किसानों ने मांग रखी कि आईबीबीआई (IBBI) से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं के माध्यम से जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य तय कर उसी आधार पर राइट ऑफ वे (RoW) के तहत मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा राजस्थान में जहां-जहां हाई ट्रांसमिशन लाइन का कार्य चल रहा है, उसका खसरा नंबर सहित रूट मैप भी सार्वजनिक किया जाए। दुर्घटना की जिम्मेदारी पर मांगा जवाब किसानों का कहना है कि यह परियोजना इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) के तहत है, इसलिए केंद्र सरकार की सभी गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में लाइन के रखरखाव के दौरान होने वाले नुकसान या किसी दुर्घटना की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी स्पष्ट किया जाए। ज्ञापन में फसल, पेड़-पौधों, निर्माण कार्य और अन्य नुकसान का आकलन काम शुरू होने से पहले करने, कंपनी के सीएसआर फंड के उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करने तथा विवादों के समाधान के लिए जिला स्तर पर संयुक्त शिकायत निवारण समिति (Grievance Redressal Committee) गठित करने की भी मांग की गई। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों को लिखित रूप से स्वीकार कर पारदर्शी तरीके से मुआवजा वितरण शुरू नहीं किया जाता, तब तक उनके खेतों में जबरन ट्रांसमिशन लाइन का कार्य नहीं होने दिया जाएगा।