नागौर के पुराने अस्पताल परिसर स्थित पालना गृह में बड़ी लापरवाही सामने आई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेड़ता के सचिव संजय कुमार मालवीय औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। उन्होंने पालना गृह के अलार्म सिस्टम की जांच की तो वह बंद मिला। उन्होंने कई बार पालने को दबाकर अलार्म चेक किया, लेकिन करीब 20 से 25 मिनट तक कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और अलार्म सिस्टम तुरंत ठीक कराने के साथ भविष्य में ऐसी लापरवाही नहीं होने के निर्देश दिए। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष तारा अग्रवाल के निर्देश पर सचिव संजय कुमार मालवीय ने पालना गृह, वन स्टॉप सेंटर, राजकीय सम्प्रेषण एवं किशोर गृह और जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सभी जगह की व्यवस्थाएं देखीं, अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए और लाभार्थियों व बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी भी दी। एमसीएच प्रभारी बोले- अलार्म सिस्टम खराब है पालना गृह में अलार्म बजने के बाद भी कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा तो एमसीएच विंग के प्रभारी मूलाराम कड़ेला को बुलाया गया। उन्होंने माना कि अलार्म सिस्टम खराब है। सचिव ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए सिस्टम तुरंत ठीक कराने, उसकी वीडियोग्राफी करवाने और रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए। वन स्टॉप सेंटर में महिला से लिया फीडबैक जेएलएन अस्पताल परिसर स्थित वन स्टॉप सेंटर में सचिव ने वहां रह रही एक महिला से बात की। उन्होंने उससे उसके मामले और मिल रही मदद के बारे में जानकारी ली। इसके बाद केंद्र प्रभारी शिल्पा आडवाणी को महिला की बेहतर देखभाल, समय पर सहायता और जरूरी कानूनी मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही काउंसलिंग, पुनर्वास और रिकॉर्ड की भी जांच की। किशोर गृह में सुविधाएं देखीं, अधिकारों की जानकारी दी राजकीय सम्प्रेषण एवं किशोर गृह में निरीक्षण के दौरान 15 विधि से संघर्षरत किशोर और एक शिशु मिले। सचिव ने भोजन, साफ-सफाई, रहने की व्यवस्था और डाइट की जांच की। यहां आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में किशोरों को उनके अधिकार, किशोर न्याय अधिनियम और निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। उनकी समस्याएं भी सुनी गईं। जेल में बंदियों से मिले, निःशुल्क कानूनी सहायता के आवेदन भरवाए जिला कारागार में निरीक्षण के दौरान बंदियों के लिए विधिक साक्षरता शिविर लगाया गया। जिन बंदियों के पास वकील नहीं था, उनसे मौके पर ही निःशुल्क विधिक सहायता के आवेदन भरवाए गए। सचिव ने भोजन, साफ-सफाई, बैरकों और दूसरी जरूरी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया और सुधार के निर्देश दिए। इसके अलावा हाल ही में जेल पहुंचे बंदियों से अलग-अलग बात कर उनके मामलों और उन्हें मिल रही कानूनी सहायता की जानकारी भी ली।