नागौर में अपहरण और अवैध वसूली के आरोपों की जांच में दो हेड कॉन्स्टेबल को एसपी ने क्लीन चिट दी है। जांच में सामने आया कि दोनों घटना के समय घटना स्थल पर नहीं थे, उनकी लोकेशन दूसरे स्थान की मिली। एक- दूसरे के सामने आने पर पीड़ित दोनों पुलिसकर्मियों को पहचान भी नहीं पाया, जिसके आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों को निर्दोष माना गया। सीओ सिटी (आईपीएस) जतिन जैन ने बताया कि पीड़ित ने शनिवार को एसपी ऑफिस में हेड कॉन्स्टेबल अशोक मीणा और रतिराम मीणा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पाया गया कि रतिराम मीणा घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे और उनकी लोकेशन भी किसी अन्य स्थान पर पाई गई। शनिवार को परिवादी ने एसपी ऑफिस में पेश होकर घटना का परिवाद सौंपा था। आरोपियों ने डीएसटी टीम बताकर की थी वारदात ​परिवादी नरपत राम ने बताया कि 17 अप्रैल 2026 की रात वह अपनी बाइक से घर जा रहा था। रास्ते में एक इनोवा कार सवार चार व्यक्तियों ने खुद को डीएसटी बीकानेर और नोखा पुलिस से संबंधित बताकर उसे जबरन गाड़ी में बैठा लिया। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और उसके पास मौजूद 25 हजार 400 रुपए कैश और मोबाइल फोन छीन लिया। ​बंधक बनाकर मांगे थे 2 लाख रुपए ​परिवाद के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित को झूठे मुकदमे में फंसाने और जान से मारने की धमकी देकर 2 लाख रुपए की मांग की। दबाव में आकर पीड़ित ने अपनी मां और परिचित नन्दु नाई से संपर्क कर पैसे मंगवाए। आरोपियों ने पीड़ित के खाते से नोखा स्थित एसबीआई एटीएम से 30 हजार रुपए निकलवाए और अन्य राशि ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई। आरोपियों ने पीड़ित का एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उसे जबरन नशीले पदार्थ के धंधे में शामिल होने की बात स्वीकारने पर मजबूर किया गया। एसपी ने करवाई जांच ​पीड़ित ने परिवाद में श्रीबालाजी थाने के एएसआई अशोक कुमार मीणा और हेड कॉन्स्टेबल रतिराम मीणा के साथ डूंगरदान नामक व्यक्ति को नामजद किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईपीएस जतिन जैन द्वारा की गई जांच में श्री बालाजी थाने के आरोपित पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने नहीं आई। घटना सही थी, लेकिन आरोप दूसरों पर लगाए गए जांच में पीड़ित के साथ लूट और अपहरण की घटना होना सही पाया गया, लेकिन इसमें नामजद किए गए पुलिसकर्मियों की संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस अब नोखा के एटीएम फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर असली आरोपियों की तलाश कर रही है। वहीं, गलत नाम दर्ज करवाकर पुलिस की छवि धूमिल करने के प्रयास के लिए परिवादी के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।